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UPSC Prelims 2026 के 8 सवालों पर विवाद, CAT ने आयोग को जारी किया नोटिस; अभ्यर्थियों ने उठाए गंभीर सवाल - aksharsamvad.com
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नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा के General Studies Paper-1 के आठ सवालों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने UPSC को नोटिस जारी किया है। याचिका में इन प्रश्नों में कथित तथ्यात्मक त्रुटियों, गलत विकल्प और निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल पूछे जाने का आरोप लगाया गया है।
यह याचिका सचिन तिवारी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से UPSC और भारत संघ के खिलाफ दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विवादित प्रश्नों का असर केवल उनके उत्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गलत प्रश्नों पर लागू निगेटिव मार्किंग के कारण उनके कुल स्कोर पर भी पड़ा है। इससे मुख्य परीक्षा के लिए उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका है।

इन 8 सवालों पर उठाई गई आपत्ति
याचिकाकर्ताओं ने UPSC Civil Services Preliminary Examination 2026 के General Studies Paper-1, Set-A के सवाल नंबर 7, 11, 45, 60, 62, 82, 86 और 96 को चुनौती दी है।
याचिका में दावा किया गया है कि कुछ प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में कोई भी विकल्प सही उत्तर नहीं था। वहीं, कुछ सवालों में तथ्यात्मक गलतियां होने का आरोप लगाया गया है। अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया है कि कुछ प्रश्न UPSC की ओर से निर्धारित सिलेबस के दायरे से बाहर पूछे गए।
16 से अधिक अंकों के नुकसान का दावा
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इन विवादित प्रश्नों का सामूहिक प्रभाव और उनसे जुड़ी निगेटिव मार्किंग अभ्यर्थियों के स्कोर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उनका अनुमान है कि इससे 16 से अधिक अंकों का नुकसान हो सकता है। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा में कुछ अंकों का अंतर भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में विवादित प्रश्नों के कारण होने वाला नुकसान उन्हें मुख्य परीक्षा की दौड़ से बाहर कर सकता है। इसी आधार पर उन्होंने CAT के समक्ष राहत की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के चर्चित मामलों में पैरवी कर चुके हैं वकील
CAT में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट शांतनु जुगतावत पैरवी कर रहे हैं। वह NLIU भोपाल के पूर्व छात्र हैं और पिछले करीब 16 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण और रिपोर्टेड मामलों में बहस की है। इनमें Kantaru Rajeevaru बनाम Indian Young Lawyers Association (Sabarimala case) और Satyama Dubey बनाम Union of India (Hathras case) जैसे मामले शामिल बताए गए हैं।
अब इस मामले में CAT के नोटिस के बाद UPSC का पक्ष सामने आने का इंतजार है। मामले की आगे की सुनवाई में विवादित प्रश्नों, उत्तरों और अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

 

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