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नेपाल में जल प्रलय का कहर

दिल्ली: नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 584 हो गई है, जबकि 2,482 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 579 और तिब्बत में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, नेपाल में 1,924 तथा तिब्बत में 558 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। दुर्गम क्षेत्रों से सूचनाएं मिलने के साथ इन आंकड़ों में बदलाव की आशंका है।

320 भारतीय नागरिक अब भी संपर्क से बाहर

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 320 भारतीय नागरिकों का अब तक पता नहीं चल सका है। इनके अतिरिक्त भारतीय मूल के करीब 100 विदेशी नागरिक भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि कम से कम 84 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री शामिल हैं। तिब्बत में फंसे 149 भारतीय नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि चीन की ओर करीब 400 भारतीय सुरक्षित हैं और अधिकारियों के संपर्क में हैं। प्रभावित नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार नेपाल और चीन के अधिकारियों से समन्वय कर रही है।

हजारों सुरक्षाकर्मी बचाव अभियान में जुटे

आपदा प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान बड़े स्तर पर जारी है। नेपाल सेना के 2,391 जवानों सहित कुल 7,451 सुरक्षाकर्मियों को राहत कार्य में लगाया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 4,451 लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है। हालांकि खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र अभियान में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

सुरंगों में फंसे लोगों को लेकर बढ़ी चिंता

बाढ़ से कई जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। करीब 933 परियोजना कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं। अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। मलबा भरने और भोजन-पानी की कमी के कारण चिंता लगातार बढ़ रही है। नेपाल ने सुरंगों में खोज अभियान, संचार व्यवस्था बहाल करने और डीएनए जांच जैसे तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी सहयोग मांगा है।

ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों का इंतजार

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी संपर्क से बाहर हैं। बचाव दल उनकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। इस समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य देशों के नागरिक शामिल बताए गए हैं। लापता लोगों के परिवार लगातार किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।

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