
जमशेदपुर : केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े चर्चित स्वर्ण चोरी मामले की जांच में जमशेदपुर के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका सामने आई है। राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML), जमशेदपुर के वैज्ञानिकों की तकनीकी जांच ने कथित तौर पर यह पता लगाने में मदद की है कि मंदिर की मूर्तियों और गर्भगृह के दरवाजे से सोना किस तरह हटाया गया था। वैज्ञानिक जांच में स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान तांबे के पैनलों पर की गई छेड़छाड़ के ऐसे संकेत मिले, जिनसे सोना हटाने की प्रक्रिया का पता चला।
सोना निकालने के लिए अपनाई गई थी रासायनिक तकनीक
जांच के अनुसार, स्वर्ण-जड़ित तांबे की प्लेटों से मूल सोना हटाने के लिए कथित तौर पर पारा (मरकरी) और विशेष रसायनों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद तांबे के पैनलों पर बेहद महीन सोने की परत यानी Nano Layer चढ़ाई गई, ताकि वास्तविक स्थिति को छिपाया जा सके। यही बारीक परत वैज्ञानिक जांच में महत्वपूर्ण सुराग बन गई। अत्याधुनिक परीक्षणों के जरिए वैज्ञानिकों ने सतह पर मौजूद धातुओं की संरचना और उनमें हुए बदलावों का विश्लेषण किया।
क्या है ‘स्ट्रिपिंग साल्ट’, जिससे अलग किया गया सोना?
मामले में सामने आए वैज्ञानिक निष्कर्षों के मुताबिक, ‘स्ट्रिपिंग साल्ट’ नामक विशेष रासायनिक मिश्रण का इस्तेमाल सोने की परत को धातु की सतह से अलग करने के लिए किया गया। जब स्वर्ण-जड़ित तांबे की प्लेटों को इस रासायनिक प्रक्रिया से गुजारा गया, तो सोना घोल में अलग हो गया और तांबे की प्लेट बच गई। बाद में कथित तौर पर इसी घोल से सोना दोबारा निकाला गया।इस पूरी प्रक्रिया ने जांच एजेंसियों को यह समझने में मदद की कि सोने की मूल परत को हटाकर उसकी जगह बेहद पतली परत कैसे बनाई गई।
2019 से शुरू हुई थी पूरे मामले की कहानी
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 में भगवान अयप्पा मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों और गर्भगृह के दरवाजे (कट्टिलपल्ली) के स्वर्ण पैनलों को पॉलिश और मरम्मत के नाम पर चेन्नई की संस्था स्मार्ट क्रिएशंस भेजा गया था। SIT की जांच में सामने आया कि संस्था ने मुंबई से संबंधित केमिकल मंगवाया था। जांच एजेंसी ने इस पूरे घटनाक्रम में उन्नीकृष्णन पोर्टी को मुख्य आरोपित बताया है।
430 गवाहों के बयान, अब चार्जशीट की तैयारी
पुलिस अब तक इस मामले में करीब 430 गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है। NML की वैज्ञानिक रिपोर्ट को जांच में अहम साक्ष्य माना जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर विशेष जांच दल (SIT) हाईकोर्ट में अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। इस तरह जमशेदपुर स्थित NML के वैज्ञानिकों की तकनीकी जांच ने वर्षों पुराने इस चर्चित मामले में सोने की परत हटाने और दोबारा चढ़ाने की कथित प्रक्रिया को समझने में जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार दिया है।