
नई दिल्ली : विश्व चैंपियनशिप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी चाइना मास्टर्स सुपर 750 टूर्नामेंट में नए उत्साह के साथ उतरने के लिए तैयार हैं। भारत की चुनौती का नेतृत्व स्टार शटलर लक्ष्य सेन करेंगे। उनके अतिरिक्त अनुभवी किदांबी श्रीकांत, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी–चिराग शेट्टी की जोड़ी और युवा खिलाड़ी उन्नति हुड्डा सहित कई भारतीय कोर्ट पर अपनी दावेदारी पेश करेंगे।टूर्नामेंट का ड्रॉ आसान नहीं है और भारतीय खिलाड़ियों को शुरुआती मुकाबलों से ही कड़ी चुनौती मिल सकती है। पुरुष एकल के पहले दौर में लक्ष्य सेन का सामना फ्रांस के विश्व चैंपियन एलेक्स लैनियर से प्रस्तावित है। आधिकारिक विश्व टूर रिपोर्ट ने भी पुरुष एकल के शुरुआती दौर में कई बड़े मुकाबलों का उल्लेख किया है।
पिछली निराशा पीछे छोड़ना चाहेंगे लक्ष्य
विश्व चैंपियनशिप में लक्ष्य सेन का सफर शुरुआत में ही समाप्त हो गया था। अब वह चाइना मास्टर्स के मंच पर मजबूत वापसी करने का प्रयास करेंगे। हालांकि, पहले मुकाबले में ही विश्व चैंपियन से भिड़ंत उनकी राह को मुश्किल बनाती है। इस चुनौती को पार करने के लिए उन्हें अपनी तेजी, मजबूत डिफेंस और आक्रामक खेल के बीच बेहतर संतुलन बनाना होगा।
श्रीकांत के अनुभव से भारत को उम्मीद
जून में यूएस ओपन सुपर 300 के फाइनल तक पहुंचने वाले किदांबी श्रीकांत का सामना पहले दौर में चीनी ताइपे के ची यू-जेन से होगा। हाल के टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन उतार-चढ़ाव वाला रहा है। ऐसे में चाइना मास्टर्स उनके लिए लय हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
सात्विक–चिराग की जोड़ी पर टिकी नजरें
पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी से भारत को पदक की बड़ी उम्मीद है। इस अनुभवी जोड़ी ने वर्ष की शुरुआत में सिंगापुर ओपन का खिताब जीतकर अपने लंबे इंतजार को समाप्त किया था। अब चीन में उनका पहला मुकाबला मेजबान देश की जोड़ी के विरुद्ध होगा। भारतीय जोड़ी को तेज रैलियों और मजबूत नेट गेम के साथ शुरुआत करनी होगी। पुरुष युगल के अन्य मुकाबले में हरिहरन अमसकरुणन और एमआर अर्जुन के सामने जापान की वरीय जोड़ी ताकुरो होकी और युगो कोबायाशी की कठिन चुनौती रहेगी।
युवा महिला खिलाड़ियों के सामने कठिन राह
महिला एकल में भारत की उम्मीदें उन्नति हुड्डा, तन्वी शर्मा और देविका सिहाग पर टिकी हैं। उन्नति का मुकाबला चीन की पांचवीं वरीय हान यू से होगा। तन्वी के सामने डेनमार्क की अमाली शुल्ज और देविका के सामने बुल्गारिया की कालोयाना नलबंतोवा की चुनौती होगी।
कुल मिलाकर चाइना मास्टर्स
भारतीय खिलाड़ियों के लिए केवल खिताब जीतने का अवसर नहीं, बल्कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अपनी तैयारी और मानसिक मजबूती परखने का भी महत्वपूर्ण मंच होगा।