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एवरेस्ट से भी कठिन बना नेपाल का महाबचाव अभियान, संकरी घाटियों से 4,000 से अधिक लोगों का एयरलिफ्ट - aksharsamvad.com
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नेपाल की दुर्गम पहाड़ी घाटी में बाढ़ के बाद राहत सामग्री पहुंचाता हेलीकॉप्टर

काठमांडू :  नेपाल में 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद रसुवा तथा नुवाकोट जिलों में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। तेज बहाव के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे प्रभावित इलाकों का जमीनी संपर्क टूट गया। ऐसे में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर ही सबसे महत्वपूर्ण साधन बन गए। अधिकारियों के अनुसार, दुर्गम पहाड़ी घाटियों में सैकड़ों उड़ानें संचालित कर 4,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। इसे नेपाल में अब तक चलाए गए सबसे बड़े हवाई बचाव अभियानों में से एक बताया गया है।

एवरेस्ट की उड़ानों से भी कठिन मिशन

अभियान में शामिल पायलटों का कहना है कि इन घाटियों में उड़ान भरना कई मायनों में एवरेस्ट क्षेत्र की नियमित उड़ानों से भी अधिक चुनौतीपूर्ण था। संकरे रास्ते, खराब मौसम, सीमित दृश्यता, बादलों के बीच छिपे लैंडिंग स्थल और लगातार बदलती परिस्थितियों ने जोखिम बढ़ा दिया था। कई स्थानों पर एक साथ एक दर्जन से अधिक हेलीकॉप्टर काम कर रहे थे। प्रभावित इलाके में अलग एयरपोर्ट या व्यवस्थित एयर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं होने के कारण पायलटों को रेडियो के माध्यम से अपनी स्थिति और ऊंचाई की जानकारी साझा करनी पड़ती थी।

हर दिन हालात के अनुसार बदली रणनीति

कैलाश हेलीकॉप्टर के कैप्टन मनिराज लामा के अनुसार, बचाव दल को हर दिन परिस्थितियों के मुताबिक अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। शुरुआत में प्राथमिकता फंसे हुए लोगों, चिकित्सकों और राहतकर्मियों को सुरक्षित निकालने की थी। इसके बाद प्रभावित बस्तियों तक भोजन, दवाइयां तथा अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई गई। कुछ दुर्गम स्थानों पर शव पड़े होने की सूचना के बाद उन्हें निकालने के लिए भी विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। हेलीकॉप्टर के नीचे लंबी रस्सी बांधकर दुर्गम हिस्सों से उन्हें बाहर लाया गया।

ड्रोन और गलत सूचनाओं ने बढ़ाईं परेशानियां

राहत कार्य के दौरान निजी ड्रोन भी चिंता का कारण बने। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में पायलट मुख्य रूप से दृश्य संकेतों और आपसी रेडियो संपर्क पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अनियंत्रित ड्रोन हेलीकॉप्टरों की उड़ान के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित पुराने और अपुष्ट वीडियो ने भी अभियान को प्रभावित किया। कई बार हेलीकॉप्टर और ड्रोन उन स्थानों पर भेजे गए, जहां बाद में कोई व्यक्ति नहीं मिला। एक अभियान में हेलीकॉप्टर ने कथित रूप से प्रभावित क्षेत्र के ऊपर लगभग 19 मिनट तक खोज की, लेकिन वहां कोई फंसा हुआ व्यक्ति नहीं पाया गया।

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