
झारखंड के तीन दिवंगत शिक्षा मंत्री-जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू। तीनों के निधन के बाद अब शिक्षा विभाग की अगली जिम्मेदारी किसे मिलेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
रांची : झारखंड की राजनीति में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक ऐसा दुखद संयोग सामने आया है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अप्रैल 2023 से सितंबर 2026 के बीच शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो चुका है।
तीनों ही नेता झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहे और अलग-अलग समय में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालते रहे। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन के पास स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग रहा, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री थे।
पहला झटका: जगरनाथ महतो का निधन
अप्रैल 2023 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निधन से शिक्षा विभाग को बड़ा झटका लगा था। उनके निधन के बाद यह सवाल उठा था कि अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी किसे मिलेगी।
उनके बाद सरकार ने मंत्रिमंडल में बदलाव करते हुए विभागीय जिम्मेदारियां आगे बढ़ाईं। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि आने वाले वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्रियों के निधन का ऐसा सिलसिला देखने को मिलेगा।
दूसरा नाम: रामदास सोरेन
इसके बाद रामदास सोरेन ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी संभाली। अगस्त 2025 में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पास रखा था। यहीं से यह सवाल फिर उठा कि शिक्षा विभाग का अगला मंत्री कौन होगा?
और अब सुदिव्य कुमार सोनू…
सितंबर 2026 में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन ने इस संयोग को और गहरा कर दिया। सुदिव्य कुमार सोनू का निधन 6 सितंबर 2026 को हुआ। वे हेमंत सोरेन सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ अन्य महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इस तरह करीब साढ़े तीन वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों के निधन ने झारखंड की राजनीति में एक बेहद असामान्य स्थिति पैदा कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल-चौथा ‘राजतिलक’ कब और किसका?
तीन मंत्रियों के निधन के बाद अब स्वाभाविक रूप से राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षा विभाग की अगली जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाएगी?
क्या सरकार किसी अनुभवी चेहरे पर भरोसा करेगी? क्या संगठन से किसी नए नाम को मौका मिलेगा? या फिर मुख्यमंत्री खुद शिक्षा विभाग की कमान अपने पास रखेंगे?
फिलहाल इन सवालों का जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन तीन मंत्रियों के निधन के बाद खाली हुई जिम्मेदारी को लेकर होने वाला अगला फैसला निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहेगा।
संयोग को अंधविश्वास से नहीं, सवालों से देखना होगा
हालांकि तीन मंत्रियों के निधन को किसी तरह के अंधविश्वास या भविष्यवाणी से जोड़ना उचित नहीं होगा। यह घटनाएं अपने-अपने कारणों और परिस्थितियों में हुई हैं। लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह एक असाधारण और दुखद संयोग जरूर है कि इतने कम अंतराल में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हुआ।
अब नजर इस बात पर है कि झारखंड के शिक्षा विभाग का चौथा ‘राजतिलक’ कब होता है और इस बार ताज किसके सिर सजता है।