सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के नेताओं के साथ पार्टनर देशों और Outreach Invitees की भागीदारी होगी। भारत की इस साल की अध्यक्षता का थीम Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability रखा गया है।
पुतिन-जिनपिंग पर टिकी दुनिया की नजर
सम्मेलन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी को लेकर है। जिनपिंग के भारत आने की संभावना को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 2019 के बाद उनका संभावित भारत दौरा होगा।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पुतिन और जिनपिंग की एक मंच पर मौजूदगी वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम हो सकती है। खासकर भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद के बाद हाल के वर्षों में आए बदलावों के बीच इस मुलाकात पर दुनिया की नजर रहेगी।
गुटेरेस भी पहुंचेंगे दिल्ली
BRICS सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के भी शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है। उनका शामिल होना सम्मेलन को अतिरिक्त कूटनीतिक महत्व देता है।
गुटेरेस की मौजूदगी में वैश्विक शांति, बहुपक्षीय सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर BRICS देशों के रुख को भी प्रमुखता मिल सकती है।
20 साल का हुआ BRICS, अब भारत के हाथ में कमान
BRICS की नींव 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने रखी थी। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद समूह का विस्तार हुआ और इसका नाम BRICS पड़ा। 2026 में संगठन अपने 20 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है।
सिर्फ बैठक नहीं, बड़े फैसलों की उम्मीद
भारत की अध्यक्षता में पूरे साल 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अब शिखर सम्मेलन में इन्हीं चर्चाओं को राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है।
BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया समेत विस्तारित सदस्यता वाले देश शामिल हैं।
ऐसे में दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका दिखाने वाला बड़ा मंच बनने जा रहा है।




