
अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले में जांच अब अहम चरण में पहुंच गई है। बरामद सामग्री की फॉरेंसिक रिपोर्ट पुलिस को मिलने के बाद जेल में बंद आठ आरोपियों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है। मामले की आगे की जांच के लिए विवेचक ने आरोपियों के बयान दोबारा दर्ज करने की अनुमति मांगी थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।
जेल में फिर दर्ज किए जाएंगे आरोपियों के बयान
जानकारी के अनुसार, विवेचक पुलिस क्षेत्राधिकारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें आरोपियों से दोबारा पूछताछ करने और उनके बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत की मंजूरी मिलने के बाद पुलिस अब न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों से जेल में पूछताछ कर सकेगी। माना जा रहा है कि इस पूछताछ में फॉरेंसिक जांच से सामने आए तथ्यों के आधार पर सवाल किए जाएंगे। हालांकि, पुलिस ने रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों को अभी सार्वजनिक नहीं किया है।
बरामद सामग्री की कराई गई थी वैज्ञानिक जांच
पुलिस के मुताबिक, विवेचना के दौरान आरोपियों के कब्जे से कथित रूप से नगदी, सिक्के, आभूषण और अन्य सामान बरामद किया गया था। इन वस्तुओं को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। अब जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बरामद सामान और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों का मिलान किए जाने की तैयारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट को इस प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। यदि वैज्ञानिक जांच के निष्कर्ष अन्य सबूतों और बयानों से मेल खाते हैं, तो इससे अभियोजन पक्ष को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, दोबारा पूछताछ के दौरान कुछ नए तथ्य भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
पहले खारिज हो चुकी है आरोपियों की अर्जी
मामले में आरोपियों की ओर से गिरफ्तारी, रिमांड और बरामदगी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। इस संबंध में अदालत में अर्जी देकर पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई थी, लेकिन न्यायालय ने उसे निरस्त कर दिया था। फिलहाल सभी आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत
सभी आरोपियों की जमानत अर्जियां विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विचाराधीन बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे। अब पुलिस की दोबारा पूछताछ और फॉरेंसिक रिपोर्ट के विश्लेषण से मामले की अगली दिशा तय होने की उम्मीद है। फिलहाल आरोप केवल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्णय अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।