
नई दिल्ली : स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा हासिल करने की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी प्रानोस फ्यूजन ने अपने कॉम्पैक्ट टोकामक रिएक्टर PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा तैयार करने का दावा किया है। निजी क्षेत्र की यह पहल भारत में परमाणु संलयन यानी न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक के विकास की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
आठ महीने में विकसित हुआ PRAGYA
करीब 40 सेंटीमीटर व्यास वाले इस कॉम्पैक्ट टोकामक रिएक्टर को कंपनी ने लगभग आठ महीने में विकसित किया है। PRAGYA को फिलहाल बिजली उत्पादन के लिए नहीं बनाया गया है। इसका उपयोग प्लाज्मा को नियंत्रित करने, उसकी गतिविधियों को समझने और फ्यूजन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का परीक्षण करने के लिए किया जाएगा। इस मशीन से मिलने वाले आंकड़ों और अनुभवों का उपयोग भविष्य में बड़े तथा अधिक शक्तिशाली फ्यूजन रिएक्टर तैयार करने में किया जा सकता है। कंपनी की योजना PRAGYA को लगभग दो दशकों तक प्रयोगात्मक रूप से संचालित करने की है।
हर साल तीन हजार प्लाज्मा शॉट का लक्ष्य
कंपनी ने प्रतिवर्ष करीब तीन हजार प्लाज्मा शॉट लेने का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब है कि रोजाना औसतन दस बार प्लाज्मा तैयार कर उससे संबंधित वैज्ञानिक जानकारियां एकत्र की जाएंगी। लगातार होने वाले इन प्रयोगों से प्लाज्मा नियंत्रण प्रणाली और टोकामक रिएक्टर के डिजाइन को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
क्या है टोकामक और कैसे करता है काम?
टोकामक एक विशेष प्रकार की मशीन है, जिसमें अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र की मदद से नियंत्रित किया जाता है। फ्यूजन प्रक्रिया में हल्के परमाणुओं को आपस में जोड़कर ऊर्जा उत्पन्न करने की कोशिश की जाती है। सूर्य और दूसरे तारों में ऊर्जा इसी मूल प्रक्रिया से बनती है। हालांकि पृथ्वी पर इस प्रक्रिया को नियंत्रित वातावरण में लंबे समय तक बनाए रखना बेहद कठिन है। इसलिए PRAGYA जैसे प्रायोगिक उपकरण भविष्य की फ्यूजन तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट पर भी होगा अनुसंधान
प्रानोस फ्यूजन उच्च तापमान पर काम करने वाले सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट पर भी शोध करने की तैयारी कर रही है। ऐसे शक्तिशाली चुंबक फ्यूजन मशीन के भीतर प्लाज्मा को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। प्रयोगों से एकत्र डेटा का उपयोग अगली पीढ़ी के रिएक्टरों की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा।
वर्ष 2030 तक नेट एनर्जी गेन का लक्ष्य
कंपनी की योजना वर्ष 2027 तक एक अन्य मैग्नेट प्रणाली को सक्रिय करने की है। इसके बाद वर्ष 2030 तक BrahmaQ नाम से नेट-एनर्जी-गेन रिएक्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नेट एनर्जी गेन का अर्थ है—रिएक्टर चलाने में खर्च हुई ऊर्जा से अधिक ऊर्जा फ्यूजन प्रक्रिया से प्राप्त होना। PRAGYA अभी एक प्रयोगात्मक मशीन है, लेकिन इसमें प्लाज्मा तैयार होना भारत की फ्यूजन ऊर्जा यात्रा के लिए एक उत्साहजनक शुरुआत मानी जा रही है।