
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया दो महीने के अंदर पूरी की जाए। न्यायालय ने सरकार से तय अवधि में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।
लंबे समय से लंबित है नियुक्ति प्रक्रिया
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। आयोग के महत्वपूर्ण पद रिक्त रहने से उसके नियमित कामकाज और विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इसी विषय को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से नियुक्तियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी।
सरकार ने अदालत के सामने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए करीब दो महीने के भीतर नियुक्तियां की जा सकती हैं। इस जवाब के बाद अदालत ने सरकार को निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरी कार्रवाई संपन्न करने का निर्देश दिया।
अनुपालन रिपोर्ट भी करनी होगी दाखिल
हाईकोर्ट ने केवल समय-सीमा निर्धारित नहीं की, बल्कि सरकार को इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया है। इसका अर्थ है कि सरकार को अदालत के सामने बताना होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए और प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची। अदालत ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई के दौरान सरकार की अनुपालन रिपोर्ट और नियुक्ति प्रक्रिया में हुई प्रगति की समीक्षा होने की संभावना है।
अभ्यर्थियों की बढ़ी उम्मीदें
जेपीएससी झारखंड में विभिन्न प्रशासनिक और सरकारी पदों के लिए नियुक्ति परीक्षाएं आयोजित करने वाली प्रमुख संवैधानिक संस्था है। ऐसे में अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर समय से नियुक्ति होना आयोग के प्रभावी संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह अदालत द्वारा तय दो महीने की अवधि में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करती है या नहीं। आगामी सुनवाई में इस मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।