
जमशेदपुर : झारखंड के शहरों में वायु प्रदूषण को लेकर सामने आए आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध वायु गुणवत्ता आंकड़ों में जमशेदपुर का वायु मानक 153 दर्ज किया गया है, जो सूची में शामिल शहरों में सबसे अधिक है। इसके बाद अब शहरों में प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी है। विशेष सेंसर लगाए जाएंगे, जो हवा की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रदूषण के संभावित स्रोतों की पहचान में मदद करेंगे।
रियल टाइम डेटा से पता चलेगा प्रदूषण का कारण
राज्य के नगर निगम क्षेत्रों में विशेष सेंसर लगाने की योजना है। इन सेंसरों के माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों और हानिकारक रसायनों की निगरानी की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा।
इस डेटा के आधार पर यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी इलाके में प्रदूषण अचानक बढ़ने के पीछे क्या कारण है। इससे प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के लिए समय पर कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जमशेदपुर का आंकड़ा 153, धनबाद 132
उपलब्ध आंकड़ों में जमशेदपुर का वायु मानक 153 दर्ज किया गया है। वहीं धनबाद का आंकड़ा 132 और हजारीबाग का 107 बताया गया है। देवघर को स्वास्थ्यकर श्रेणी में रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में प्रदूषण के कारण भी अलग हो सकते हैं। औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों का धुआं, धूल और कचरा प्रबंधन जैसे कारक वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
औद्योगिक शहर में प्रदूषण की होगी बारीकी से निगरानी
जमशेदपुर औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है। नए सेंसर इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
केंद्रीय वायु प्रदूषण नियंत्रण संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञ अजय राय के अनुसार, विकसित किया गया सेंसर प्रदूषण की पहचान करने में मदद करेगा। इससे केवल प्रदूषण का स्तर ही नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति को समझने में भी सहायता मिलेगी।
कचरा जलाने से लेकर औद्योगिक प्रदूषण तक पर नजर
रिपोर्ट के अनुसार राज्य के अलग-अलग शहरों में प्रदूषण के कारण अलग-अलग हैं। पलामू, गढ़वा और देवघर जैसे क्षेत्रों में प्लास्टिक जलाने और कचरा प्रबंधन की कमी को भी प्रदूषण के कारणों से जोड़ा गया है।
राज्य सरकार ने औद्योगिक और सामान्य प्रदूषण दोनों को कम करने के लिए संयुक्त रणनीति पर काम शुरू किया है। नगर विकास विभाग और वन एवं पर्यावरण विभाग के स्तर पर इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
अब आंकड़ों से आगे बढ़कर होगी कार्रवाई
सेंसर लगने के बाद शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी सिर्फ समय-समय पर लिए गए आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। रियल टाइम डेटा मिलने से प्रदूषण बढ़ने वाले इलाकों और संभावित स्रोतों की पहचान तेजी से हो सकेगी।
जमशेदपुर में 153 के आंकड़े के बाद यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे शहर की हवा खराब होने के वास्तविक कारणों को चिन्हित कर नियंत्रण के उपाय तय करने में मदद मिल सकती है।