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झारखंड हाईकोर्ट को मिलेंगे 3 नए जज! सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मुहर, गढ़वा-पलामू-साहिबगंज के न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल - aksharsamvad.com
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रांची : झारखंड हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड के तीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों (पीडीजे) को हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश पर सहमति जताई है। कॉलेजियम की मंजूरी के बाद अब प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास जाएगा। केंद्र की स्वीकृति और नियुक्ति से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद तीनों न्यायिक अधिकारी हाईकोर्ट में नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम पर बनी सहमति

कॉलेजियम की सिफारिश में गढ़वा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद, साहिबगंज के पीडीजे अखिल कुमार और पलामू के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीराम शर्मा के नाम शामिल हैं।

तीनों अधिकारी फिलहाल अलग-अलग जिलों में न्यायिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद अब उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करेगी।

जिला अदालतों से हाईकोर्ट तक बढ़ेगी जिम्मेदारी

मनोज प्रसाद वर्तमान में गढ़वा में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। वहीं अखिल कुमार साहिबगंज और श्रीराम शर्मा पलामू में पीडीजे की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

हाईकोर्ट में नियुक्ति होने के बाद इन अधिकारियों की न्यायिक भूमिका का दायरा काफी बढ़ जाएगा। उनके अनुभव का लाभ राज्य की उच्च न्यायिक व्यवस्था को मिलने की उम्मीद है।

अब केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें

कॉलेजियम की सिफारिश अंतिम नियुक्ति नहीं होती। अब प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। केंद्र स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति से संबंधित कदम आगे बढ़ेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति की नियुक्ति प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने पर तीनों को झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी मिल सकती है।

लंबित मामलों के निपटारे में मिल सकती है रफ्तार

झारखंड हाईकोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। खासकर लंबित मामलों की सुनवाई और उनके निस्तारण में अतिरिक्त न्यायिक क्षमता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कॉलेजियम की यह सिफारिश ऐसे समय में सामने आई है, जब अदालतों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अब निगाहें केंद्र सरकार की मंजूरी और इसके बाद होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया पर हैं।

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