रांची : हिंदी अब सिर्फ भारत की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया के कई देशों में भारतीय संस्कृति को समझने का माध्यम बन रही है। श्रीलंका, थाईलैंड, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के विद्यार्थी हिंदी सीखकर भारत की भाषा, साहित्य, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने की कोशिश कर रहे हैं। हिंदी दिवस के अवसर पर यह तस्वीर हिंदी की बढ़ती वैश्विक पहुंच और उसके प्रति विदेशी युवाओं की रुचि को सामने लाती है।
भारतीय संस्कृति बनी हिंदी सीखने की बड़ी वजह
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल बाजार और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित कर रही है। कई विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखना केवल भाषा का अध्ययन नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली और संस्कृति को समझने का जरिया बन गया है। बॉलीवुड सिनेमा, हिंदी गीत, धार्मिक पर्यटन और भारतीय साहित्य भी विदेशी युवाओं में हिंदी के प्रति दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।
श्रीलंका और थाईलैंड में बौद्ध विरासत, रामायणकालीन स्मृतियां, धार्मिक पर्यटन और भारतीय साहित्य हिंदी सीखने के प्रमुख आकर्षण हैं। वहीं चीन में हिंदी सीखने का संबंध कूटनीतिक, रणनीतिक और सीमा संबंधी विषयों से भी जुड़ा है। दक्षिण कोरिया में भारतीय बाजार में काम करने की संभावनाएं युवाओं को हिंदी की ओर आकर्षित कर रही हैं।
सीयूजे में विदेशी विद्यार्थियों को मिल रहा मंच
इस वैश्विक प्रक्रिया में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के माध्यम से विभिन्न देशों के विद्यार्थियों को हिंदी सीखने और भारतीय समाज-संस्कृति को समझने का अवसर मिल रहा है। विभाग के प्राध्यापक डॉ. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी के अनुसार, अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखने के कारण भी अलग-अलग हैं।
विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखना उनके अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी बन रहा है। विदेशी विद्यार्थी हिंदी के जरिए भारत के साहित्य और सामाजिक जीवन को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी को नृत्य पसंद, तो किसी को साहित्य
थाईलैंड की छात्रा रश्मि मुदुशिका के लिए भारतीय संस्कृति और नृत्य हिंदी सीखने की प्रेरणा हैं। उनका कहना है कि उन्हें भारतीय संस्कृति बहुत पसंद है और नृत्य-पहनावे में रुचि के कारण उन्होंने हिंदी को चुना। वह भारतीय संस्कृति को और करीब से अनुभव करना चाहती हैं।
श्रीलंका की शोधार्थी शुभा रत्नायक हिंदी के जरिए बौद्ध दर्शन, पाली साहित्य और भारतीय समाज की साझा संवेदनाओं को समझना चाहती हैं। श्रीलंका और भारत के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध भी उनके अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हिंदी से जुड़ रही दुनिया
विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि बताती है कि हिंदी का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है। भाषा अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य, शिक्षा, रोजगार और देशों के बीच संबंधों को जोड़ने वाली कड़ी बन रही है। हिंदी दिवस पर विदेशी विद्यार्थियों की यह पहल इस बात का संकेत है कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए दुनिया हिंदी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।



