
नई दिल्ली : इंसान की औसत और अधिकतम उम्र को लेकर वैज्ञानिकों की दुनिया में नई बहस छिड़ी है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर डेविड सिंक्लेयर का मानना है कि इंसान के लिए 150 साल तक जीना संभव हो सकता है। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थकेयर और बायोटेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहे बदलाव आने वाले वर्षों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
आज की सीमा 122 साल, लक्ष्य 150
अब तक दर्ज इंसानी उम्र का रिकॉर्ड 122 साल 164 दिन है। यह रिकॉर्ड फ्रांस की जीन लुईस कैलमेंट के नाम है। हालांकि वैज्ञानिकों के एक वर्ग का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भी इंसान की अधिकतम उम्र करीब 125 साल तक पहुंच सकती है। वहीं 150 साल की उम्र को फिलहाल भविष्य की संभावित सीमा के तौर पर देखा जा रहा है।
सिंक्लेयर के अनुसार, आज जन्म लेने वाले बच्चों के पास आने वाली दशकों में ऐसी तकनीक उपलब्ध हो सकती है, जिसकी अभी कल्पना भी मुश्किल है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में AI और हेल्थकेयर के क्षेत्र में हुए बदलावों ने लंबी उम्र की संभावना को पहले की तुलना में अधिक वास्तविक बनाया है।
बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने पर जोर
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोशिकाओं की कार्यक्षमता कम होती जाती है। वैज्ञानिक अब केवल कैंसर, हार्ट डिजीज या अल्जाइमर जैसी बीमारियों का इलाज करने के बजाय एजिंग यानी उम्र बढ़ने की जैविक प्रक्रिया को ही प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस दिशा में कोशिकाओं की सफाई, खराब या बूढ़ी कोशिकाओं को हटाने वाली दवाओं और ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ पर रिसर्च चल रही है।
कोशिकाओं को फिर युवा बनाने की कोशिश
रिसर्च का एक अहम क्षेत्र एपिजेनेटिक रीप्रोग्रामिंग है। इसमें कोशिकाओं की ‘बायोलॉजिकल मेमोरी’ को बदलकर उन्हें युवा अवस्था जैसा व्यवहार कराने की कोशिश की जाती है।
इसके अलावा सेनोलिटिक्स पर भी शोध हो रहा है। इनका उद्देश्य उम्र के साथ शरीर में जमा होने वाली खराब या बूढ़ी कोशिकाओं को चुनकर हटाना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे उम्र से जुड़ी कई समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
AI और नई दवाओं से बढ़ी उम्मीद
AI की मदद से नई दवाओं की खोज और उनके परीक्षण की प्रक्रिया तेज हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रेट्रोसिटिव जैसी AI-जनरेटेड दवा के क्लिनिकल ट्रायल डेटा से भी उम्र और बीमारी से जुड़े शोध को नई दिशा मिली है।
दुनिया भर के अरबपति और टेक उद्यमी भी लंबी उम्र से जुड़ी रिसर्च में निवेश कर रहे हैं। सिलिकॉन वैली में जीन थेरेपी, बायोलॉजिकल रिप्लेसमेंट और कोशिकीय स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रयोगों पर बड़ी रकम खर्च की जा रही है।
हालांकि 150 साल तक इंसान के जीवित रहने की संभावना अभी वैज्ञानिक भविष्यवाणी है, स्थापित तथ्य नहीं। मौजूदा रिकॉर्ड 122 साल 164 दिन का है और 150 साल तक पहुंचने के लिए अभी कई वैज्ञानिक और चिकित्सकीय चुनौतियों का समाधान करना बाकी है।