
नई दिल्ली : अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फेडरल रिजर्व के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय बैंक द्वारा बेंचमार्क ब्याज दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि किए जाने के बाद ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि ऊंची ब्याज दरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उनके प्रशासन की आर्थिक नीतियों की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं। नई बढ़ोतरी के बाद ब्याज दर की लक्षित सीमा 3.75 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 के बाद अमेरिका में ब्याज दरों में यह पहली वृद्धि है।
फेडरल रिजर्व पर साधा सीधा निशाना
नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित अपनी मिड-टर्म चुनावी रैली से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि केंद्रीय बैंक जरूरत से ज्यादा सख्त नीति अपना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्याज दरों में वृद्धि का उद्देश्य आर्थिक प्रदर्शन को कमजोर करना है। ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अधिकारियों पर राजनीतिक कारणों से फैसले लेने का भी आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें फेड चेयर केविन वॉर्श पर अब भी भरोसा है और वे चाहते हैं कि वॉर्श स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभाते रहें।
फैसले से पहले वॉर्श से हुई थी बातचीत
राष्ट्रपति के अनुसार, दरें बढ़ाने की घोषणा से पहले उनकी केविन वॉर्श से बातचीत हुई थी। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने फेड चेयर से कहा था कि बोर्ड के साथ मिलकर निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन संबंधित बैठक में उनकी व्यक्तिगत भूमिका निर्णायक नहीं होगी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लगातार कई देशों का आर्थिक भार उठा रही है। उन्होंने व्यापार घाटे का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यदि अमेरिका उन देशों के साथ व्यापार रोक दे, जिनके साथ उसका बड़ा घाटा है, तो देश हर वर्ष लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर बचा सकता है।
महंगाई नियंत्रण को बताया गया कारण
दूसरी तरफ, फेडरल रिजर्व ने अपने फैसले के पीछे महंगाई को प्रमुख वजह बताया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि मजबूत घरेलू खर्च, उत्पादकता में सुधार और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश के कारण आर्थिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सख्त मौद्रिक नीति आवश्यक मानी गई। फेड के अनुसार, महंगाई अभी निर्धारित लक्ष्य से ऊपर है। ब्याज दरों में वृद्धि से मांग को नियंत्रित करने और मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत के लक्ष्य की ओर वापस लाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, महंगे कर्ज का असर मकान, वाहन और व्यावसायिक ऋण लेने वालों पर पड़ने की आशंका है।