
पूर्वी सिंहभूम : 20 सितंबर। शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती इस संदेश को पूर्वी सिंहभूम जिले के हजारों नवसाक्षरों ने रविवार को अपनी उत्साहपूर्ण भागीदारी से साबित किया। उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 20 सितंबर 2026 को जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर नवसाक्षरों की परीक्षा आयोजित की गई। इसमें करीब 12,500 नवसाक्षरों ने हिस्सा लेकर अपने बुनियादी ज्ञान और साक्षरता कौशल का प्रदर्शन किया।
विभिन्न स्थानों पर बनाए गए परीक्षा केंद्र
परीक्षा के व्यवस्थित संचालन के लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में केंद्र बनाए गए थे। सुबह से ही केंद्रों पर नवसाक्षरों का पहुंचना शुरू हो गया था। उम्र और दैनिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। कई केंद्रों पर महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता भी देखने को मिली। परीक्षा कक्षों में प्रतिभागियों ने प्रश्नपत्र हल कर अब तक अर्जित ज्ञान का आकलन कराया। इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य नवसाक्षरों की पढ़ने, लिखने और सामान्य गणना से जुड़ी बुनियादी क्षमताओं को परखना था। साथ ही उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर दैनिक जीवन में साक्षरता के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रेरित करना भी कार्यक्रम का अहम लक्ष्य रहा।
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने किया निरीक्षण
परीक्षा के संचालन और उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए झारखंड के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी जावेद अनवर ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परीक्षा कक्षों की व्यवस्था, प्रश्नपत्र वितरण, संचालन प्रक्रिया और नवसाक्षरों की सहभागिता की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से भी बातचीत की। परीक्षा केंद्रों पर प्रतिभागियों के उत्साह को कार्यक्रम की सकारात्मक उपलब्धि माना गया।
आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान देना नहीं, बल्कि निरक्षर वयस्कों को जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी है। बुनियादी शिक्षा मिलने से लाभार्थी सरकारी योजनाओं की जानकारी समझने, आवश्यक प्रपत्र भरने, बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने तथा दैनिक जीवन के जरूरी कार्य स्वयं करने में अधिक सक्षम बन सकते हैं। नवसाक्षरों की बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि जिले में वयस्क शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। यह पहल उन लोगों के लिए नया अवसर लेकर आई है, जो किसी कारणवश पहले औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।
सामूहिक सहयोग से सफल हुआ आयोजन
परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, संबंधित पदाधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी शिक्षकों और अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयास से परीक्षा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से पूरी हुई। जिले में साक्षरता को बढ़ावा देने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।