
नई दिल्ली : नागालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘अंग’ (Angh) ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्लेटफॉर्म प्राइज जीतकर ध्यान खींचा है। तेजा रियो के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पिता और बेटे की कहानी के जरिए बदलते समाज, आस्था और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े सवाल उठाती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस सराहना से नागालैंड की कहानियों को नए दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिला है।
क्या है फिल्म ‘अंग’ की कहानी?
फिल्म की कहानी 1960 के दशक के नागालैंड में घटती है। इसके केंद्र में एक गांव के मुखिया और उनका बेटा हैं। आसपास की दुनिया तेजी से बदल रही है और धार्मिक परिवर्तन का प्रभाव उनके जीवन तक पहुंच रहा है। इस बदलाव के बीच पिता-बेटे का रिश्ता और अपनी परंपराओं से उनका जुड़ाव कहानी को आगे बढ़ाता है। ‘अंग’ स्थानीय संस्कृति को केवल पृष्ठभूमि की तरह इस्तेमाल नहीं करती। परिवार के भीतर उठने वाले सवालों के माध्यम से यह दिखाती है कि सामाजिक बदलाव अलग-अलग लोगों को किस तरह प्रभावित कर सकता है। फिल्म का अधिकांश हिस्सा कोन्याक भाषा में है।
तेजा रियो की फीचर फिल्म को पुरस्कार
साझा किए गए समाचार स्क्रीनशॉट के अनुसार, ‘अंग’ तेजा रियो की पहली फीचर फिल्म है। इससे पहले उन्होंने इसी विषय पर एक लघु फिल्म बनाई थी। फीचर फिल्म के रूप में कहानी को विस्तार देने पर उसे टोरंटो के प्लेटफॉर्म कार्यक्रम में स्थान मिला और फिर पुरस्कार हासिल हुआ। पुरस्कार से फिल्म के कलाकारों और निर्माताओं के काम को पहचान मिली है। साथ ही, यह उपलब्धि उन क्षेत्रीय फिल्मकारों के लिए भी उत्साहजनक है जो अपनी भाषा और अपने समुदाय की कहानियां बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं।
ऑस्कर को लेकर क्या स्थिति है?
इस जीत को ऑस्कर 2027 की दौड़ से जोड़ा गया है। हालांकि, प्लेटफॉर्म प्राइज जीतना अपने आप में ऑस्कर नामांकन या भारत की आधिकारिक प्रविष्टि होने की पुष्टि नहीं है। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान जरूर मिली है; ऑस्कर से जुड़ी स्थिति अलग आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल ‘अंग’ की उपलब्धि यही है कि नागालैंड में रची-बसी एक कहानी ने टोरंटो के मंच पर पुरस्कार जीता और व्यापक चर्चा शुरू की।