
जमशेदपुर : वर्ष 2009 में नौवीं की परीक्षा देने के लिए घर से निकले मंगल महतो की कहानी अब उसकी गिरफ्तारी के बाद फिर चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक, उस दिन वह परीक्षा केंद्र पहुंचने के बजाय माओवादी दस्ते में शामिल हो गया था। इसके बाद झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में उसकी सक्रियता बढ़ी। अब पश्चिम बंगाल में मंगल और उसकी पत्नी मालती मुर्मू के पकड़े जाने के बाद पुलिस उनके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, दोनों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है।
परीक्षा के बहाने घर से निकला था मंगल
रिपोर्ट के अनुसार, मंगल वर्ष 2008 में कुरियर के रूप में माओवादी संगठन से जुड़ा था। अगले वर्ष नौवीं की परीक्षा के लिए निकला, लेकिन घर नहीं लौटा। समय के साथ संगठन में उसकी भूमिका बढ़ती गई और वह जोनल कमांडर के स्तर तक पहुंचा। पुलिस का दावा है कि सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहने के दौरान वह एके-47 लेकर चलता था। यह दावा पुलिस की जांच का हिस्सा है; गिरफ्तारी से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक जानकारी अभी प्रतीक्षित है।
मालती भी संगठन से जुड़ी थी
पुलिस के अनुसार, आर्थिक कठिनाइयों के बीच किशोरावस्था में मालती मुर्मू अपने चाचा के घर से निकलकर माओवादी दस्ते में शामिल हुई थी। बाद में उसकी मुलाकात मंगल से हुई और दोनों ने विवाह किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मालती दस्ते के साथ इंसास राइफल लेकर चलती थी। दोनों को संगठन के वरिष्ठ सदस्य कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के करीबी लोगों में गिना जाता था। ये बातें पुलिस और रिपोर्ट में आए विवरण पर आधारित हैं।
गिरफ्तारी के बाद जंगलों में तलाश की तैयारी
असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने सहयोगियों पर पुलिस की नजर बढ़ी है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के सालबनी थाना क्षेत्र के सरबेड़िया गांव से मंगल और मालती को पकड़े जाने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों वहां एक रिश्तेदार के घर ठहरे थे। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस झारखंड–बंगाल सीमा के जंगलों में छिपाए गए संभावित हथियारों और विस्फोटक सामग्री की तलाश की तैयारी कर रही है। फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है।
अब जांच से क्या स्पष्ट होगा?
पुलिस को यह पता लगाना है कि दोनों हाल के वर्षों में किन लोगों के संपर्क में थे और सीमावर्ती क्षेत्र में उनकी क्या भूमिका थी। पूछताछ और संभावित तलाशी के नतीजे आने के बाद ही इन सवालों पर स्थिति साफ होगी। गिरफ्तारी, आरोपों और संभावित बरामदगी को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।