
जमशेदपुर : जमशेदपुर के युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने अब कौशल प्रशिक्षण को स्थानीय जरूरत और भविष्य के रोजगार के अवसरों से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिला कौशल समिति की बैठक हुई। बैठक में कौशल विकास योजनाओं की प्रगति से लेकर प्रशिक्षण के बाद युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार से जोड़ने तक की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की गई।
सिर्फ प्रमाण-पत्र नहीं, नौकरी तक पहुंचाने पर जोर
उपायुक्त ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण केवल प्रमाण-पत्र हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए और इसके बाद उन्हें रोजगार, स्वरोजगार या उद्यमिता से जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में संचालित पाठ्यक्रम, प्रशिक्षणार्थियों की संख्या, उपस्थिति, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मूल्यांकन की स्थिति की समीक्षा की गई। प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं को रोजगार मिलने की स्थिति की भी जानकारी ली गई।
टाटा स्टील-टाटा मोटर्स समेत उद्योगों से बनेगा तालमेल
जिले में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए स्थानीय उद्योगों, प्रतिष्ठानों और संभावित नियोक्ताओं के साथ समन्वय मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स समेत अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस बात पर चर्चा हुई कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाए।
इससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी कम करने की कोशिश की जाएगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को संभावित नियोक्ताओं तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
‘फ्यूचर जॉब’ पर भी हुई चर्चा
बैठक में बदलती तकनीक और आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप में होने वाले बदलाव को देखते हुए ‘फ्यूचर जॉब रोल’ पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को ऐसे कौशल पाठ्यक्रमों की पहचान करने पर जोर दिया गया, जिनकी आने वाले वर्षों में रोजगार बाजार में मांग बढ़ सकती है।
इसका उद्देश्य युवाओं को केवल वर्तमान नौकरियों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में उभरने वाले रोजगार के अवसरों के लिए भी तैयार करना है।
प्रखंड स्तर पर युवाओं को किया जाएगा जागरूक
उप विकास आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण केंद्रों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं और प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
कौशल विकास योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के लिए प्रखंड स्तर पर जागरूकता और युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने की गतिविधियां प्रभावी तरीके से चलाने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के बाद युवाओं की होगी ट्रैकिंग
बैठक में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं का अद्यतन आंकड़ा तैयार रखने का निर्देश दिया गया। प्रशासन यह भी देखेगा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कितने युवा नौकरी से जुड़े, कितनों ने स्वरोजगार शुरू किया और कितने युवा अभी रोजगार की तलाश में हैं।
स्वरोजगार की संभावना वाले प्रशिक्षणार्थियों को सरकारी योजनाओं, ऋण और वित्तीय सहायता से जोड़ने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
जिले की जरूरत के हिसाब से बदलेगा प्रशिक्षण का फोकस
उपायुक्त ने अधिकारियों को कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। बैठक में इस बात पर जोर रहा कि जिले में उपलब्ध रोजगार की वास्तविक संभावनाओं को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं, ताकि प्रशिक्षण लेने के बाद युवाओं को रोजगार पाने में आसानी हो।
बैठक में जिला नियोजन पदाधिकारी, सहायक श्रमायुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कौशल पदाधिकारी, डीपीएम जेएसएलपीएस, आरसेटी, यूएनडीपी, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील के प्रतिनिधियों सहित जिला कौशल समिति से जुड़े अधिकारी, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों एवं एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।