
नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी तथा सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। पार्टी की ओर से जारी सूची में कई वरिष्ठ नेताओं और अनुभवी संगठनकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में भी नए चेहरों को संगठन की कमान सौंपी गई है।
तत्काल प्रभाव से लागू हुईं नियुक्तियां
भाजपा की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं की संगठनात्मक क्षमता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए विभिन्न राज्यों के लिए नई जिम्मेदारियां तय की हैं। इस फेरबदल में देश के कुल 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। अंडमान-निकोबार से लेकर पश्चिम बंगाल तक अलग-अलग नेताओं को प्रभारी और सह-प्रभारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा राज्यों और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय को अधिक मजबूत करना चाहती है।
विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी
पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में विशेष महत्व रखता है। ऐसे में विनोद तावड़े की नियुक्ति को भाजपा की भावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। संगठनात्मक मामलों में उनके अनुभव का लाभ प्रदेश इकाई को मिलने की उम्मीद है। सह-प्रभारियों की बड़ी टीम प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी की गतिविधियों, कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठन विस्तार पर ध्यान दे सकती है।
हरीश द्विवेदी संभालेंगे बिहार
बिहार की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को सौंपी गई है। उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता को सह-प्रभारी बनाया गया है। बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई टीम प्रदेश नेतृत्व के साथ मिलकर संगठनात्मक कार्यक्रमों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर काम करेगी।
राज्यों में तालमेल बढ़ाने पर जोर
नई सूची में अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित सभी प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जमीनी संगठन को सक्रिय करना, बूथ स्तर तक समन्वय बढ़ाना और केंद्रीय नेतृत्व की योजनाओं को प्रदेश इकाइयों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना हो सकता है। आने वाले समय में इन नए प्रभारियों की भूमिका पार्टी के संगठनात्मक अभियानों में महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।