खेत की मिट्टी में पहुंच रहे भारी धातु
अध्ययन के मुताबिक बिना उपचार किए गए अपशिष्ट जल से सिंचाई के कारण मोलिब्डेनम, एल्युमिनियम, जिंक, निकेल, क्रोमियम, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुएं कृषि मिट्टी में पहुंच रही हैं। पौधों की जड़ों द्वारा इनके अवशोषण के कारण कई सब्जियों में भी इनका जैव-संचयन पाया गया।
प्याज में निकेल 65 गुना, पालक में 97 गुना अधिक
शोधकर्ताओं ने विभिन्न सामान्य सब्जियों की जांच की। इसमें प्याज में निकेल का स्तर निर्धारित सीमा से 65 गुना और पालक में 97 गुना अधिक पाया गया। सफेद मूली में क्रोमियम 11 गुना, पालक में 12 गुना और सरसों में 22 गुना अधिक दर्ज किया गया।
लाल मूली में मोलिब्डेनम 340.06 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और क्रोमियम 36.58 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया। मेथी में जिंक 177.72 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम, धनिया में निकेल 19.91 मिलीग्राम और कैडमियम 1.59 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। सरसों में सीसे का स्तर 5.86 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया।
कैंसरकारी जोखिम भी सामने आया
अध्ययन में सब्जियों के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार हैजर्ड इंडेक्स सुरक्षित सीमा से काफी अधिक रहा। वहीं कई सब्जियों में कैंसर संबंधी जोखिम भी चिंता का विषय पाया गया। लाल मूली में यह 0.17, धनिया में 0.16 तथा पालक और सफेद मूली में 0.14 दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं ने इसमें मुख्य रूप से निकेल और क्रोमियम के योगदान की बात कही है।
प्रदूषण रोकने और खेती की निगरानी पर जोर
अध्ययन का नेतृत्व डीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. दिनबंधु साहू ने किया। उन्होंने प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी और फसलों की नियमित सरकारी निगरानी की जरूरत बताई। साथ ही यमुना में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियंत्रण और किसानों को कम भारी धातु जमा करने वाली फसलों की ओर स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।



