
रांची : राजधानी के डोरंडा थाना क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं के कथित अवैध वध और खरीद-बिक्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान एक स्थान से करीब 450 पशुओं के चमड़े एवं हड्डियों सहित अन्य अवशेष बरामद किए गए। मौके पर मौजूद 84 गोवंशीय पशुओं को सुरक्षित बचाने का दावा भी किया गया है। मामले में 34 नामजद और 25 अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
गुप्त सूचना के बाद हुई छापेमारी
पुलिस को डोरंडा थाना क्षेत्र में कथित रूप से गोवंशीय पशुओं को चोरी कर लाने, उनका अवैध वध करने और बिक्री के उद्देश्य से रखने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने संबंधित स्थान पर छापेमारी की। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में चमड़ा और हड्डियां मिलने की बात सामने आई। बरामद सामान की विस्तृत सूची तैयार की गई है और उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया है।
84 पशुओं को सुरक्षित निकाला गया
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से कुल 84 जीवित गोवंशीय पशुओं को मुक्त कराया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन पशुओं को लोगों के बीच जिम्मेदारी के साथ सौंपा गया। संबंधित लोगों को पशुओं की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।अधिकारियों ने बताया कि मौके पर पशु चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण बरामद अवशेषों को तत्काल पुलिस निगरानी में सुरक्षित रखा गया। पशु चिकित्सक की मौजूदगी में नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई जाएगी। वैज्ञानिक परीक्षण से यह स्पष्ट करने में सहायता मिलेगी कि अवशेष किस प्रकार के पशुओं के हैं।
34 नामजद, 25 अज्ञात पर मामला
प्राथमिकी में कुल 34 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 25 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपियों में अधिकतर डोरंडा के कुरैशी मोहल्ला क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। सभी पर संगठित तरीके से पशुओं की चोरी, कथित अवैध वध और बिक्री के लिए उन्हें रखने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गतिविधि से अन्य लोग भी जुड़े हैं या नहीं।
नेटवर्क और आपूर्ति शृंखला की जांच
पुलिस अब पशुओं को लाने के स्रोत, परिवहन में इस्तेमाल साधनों और कथित बिक्री नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच भी की जा सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, साक्ष्यों और पशु चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।