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रांची में डॉग बाइट का डरावना आंकड़ा, छह महीने में 31 हजार से अधिक लोग पहुंचे अस्पताल - aksharsamvad.com
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रांची की सड़क पर भोजन की तलाश करते आवारा कुत्ते; छह महीने में डॉग बाइट के 31,368 मामले दर्ज।

रांची : जिले में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। मार्च से अगस्त 2026 के बीच सदर अस्पताल सहित रांची के सभी 14 प्रखंडों के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉग बाइट के कुल 31,368 मामले दर्ज किए गए। इस हिसाब से औसतन हर दिन 170 से अधिक लोगों को कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचना पड़ा। राहत की बात यह रही कि स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी। समय पर इलाज मिलने के कारण इस अवधि में किसी मरीज में रेबीज की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद हर महीने हजारों मामले सामने आना आवारा कुत्तों के नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मार्च और अप्रैल में छह हजार से ज्यादा मामले

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च में सबसे अधिक 6,066 लोग कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। अप्रैल में 6,012, मई में 5,423 और जून में 4,925 मामले दर्ज किए गए। जुलाई में यह संख्या घटकर 4,209 रही, जबकि अगस्त में दोबारा बढ़कर 4,355 हो गई। मार्च की तुलना में अगस्त में मामलों की संख्या कम जरूर हुई, लेकिन हर महीने चार हजार से अधिक पीड़ितों का सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

काटने के बाद घाव को 15 मिनट तक धोएं

चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते के काटने या खरोंच लगने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए। प्रभावित स्थान को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना आवश्यक है। इसके बाद बिना देर किए नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। घाव छोटा दिखाई देने अथवा कुत्ते के सामान्य नजर आने पर भी उपचार को टालना खतरनाक हो सकता है। चिकित्सक घाव की श्रेणी और संपर्क की प्रकृति देखकर एंटी रेबीज वैक्सीन तथा जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन देने का निर्णय लेते हैं।

लक्षण आने का इंतजार हो सकता है जानलेवा

रेबीज का संक्रमण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने के बाद बीमारी गंभीर हो सकती है। लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा साबित होता है, जबकि समय पर पोस्ट-एक्सपोजर उपचार से इसे रोका जा सकता है। इसलिए पीड़ित को घरेलू नुस्खे अपनाने या घाव छिपाने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना जरूरी

केवल अस्पतालों में वैक्सीन की उपलब्धता से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, नियमित निगरानी और कूड़ा-कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाना जरूरी है। खुले में भोजन और कचरा मिलने से कुत्तों की संख्या तथा उनका जमावड़ा बढ़ सकता है। अभिभावकों को बच्चों को आवारा कुत्तों से दूरी बनाकर रखने, उन्हें छेड़ने या अचानक खाना खिलाने से बचने की सीख देनी चाहिए। किसी बच्चे को कुत्ता काटे या खरोंच दे तो घटना छिपाने के बजाय तुरंत इलाज कराना आवश्यक है।

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