
लखनऊ : भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आईं पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रहकर राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय होने का संकेत दिया है। खास बात यह है कि फिलहाल वह किसी स्थापित राजनीतिक पार्टी के साथ जाने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपनी राह बनाने की तैयारी में हैं। दिव्या मित्तल के फैसले को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक पूर्व नौकरशाह का सीधे जनता से संवाद स्थापित करने का प्रयास राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर सकता है।
जनता से सीधे जुड़ने की बनाई रणनीति
दिव्या मित्तल ने वीडियो संदेश के माध्यम से लोगों के सामने अपनी भावी योजना रखी। उन्होंने समर्थकों और आम नागरिकों से सीधे संपर्क स्थापित करने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से संदेश भेजने की अपील भी की है। इससे माना जा रहा है कि उनकी शुरुआती रणनीति परंपरागत राजनीतिक संगठन के बजाय प्रत्यक्ष जनसंवाद और डिजिटल माध्यम पर आधारित हो सकती है। हालांकि उनके राजनीतिक संगठन का नाम, विचारधारा, सदस्यता अभियान, संभावित चुनाव क्षेत्र और उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं की गई है। इन विषयों पर औपचारिक घोषणा के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आएगी।
राजनीतिक दलों से दूरी रखने का फैसला
इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल के भाजपा, कांग्रेस या समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कांग्रेस की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की संभावना पर भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। अब स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा शुरू करने के संकेत ने इन चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में उनके राजनीतिक प्रवेश की औपचारिकता को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, इसलिए उनके संगठन और चुनावी योजना पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।
13 वर्षों की प्रशासनिक पारी समाप्त
2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र दिया था। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया, जिसके बाद 15 सितंबर से उनकी सेवा समाप्त हो गई। अपने प्रशासनिक कार्यकाल में वह मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया की जिलाधिकारी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहीं। मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की पहल ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई थी।
2027 से पहले बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे समय में प्रशासनिक अनुभव और सोशल मीडिया पर मजबूत पहचान रखने वाली पूर्व अधिकारी का स्वतंत्र रास्ता चुनना सियासी समीकरणों में चर्चा का नया विषय बन सकता है। अब सबकी नजर उनके औपचारिक संगठन, मुद्दों और चुनावी रणनीति की घोषणा पर रहेगी।