
रांची : जेपीएससी परीक्षा घोटाला और प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन प्रमुख आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को तीनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने प्रथम दृष्टया ओएमआर शीट में हेरफेर, परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और संगठित साजिश जैसे आरोपों को गंभीर माना है।
इन तीन आरोपियों को नहीं मिली राहत
अदालत ने टीएसआर के निदेशक रामवीर सिंह, जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक के सहायक एवं संयुक्त सचिव के निजी सहायक के रूप में कार्यरत सोनू कुमार तथा आयोग के एक सदस्य के निजी सहायक बृज कुमार राम की जमानत अर्जियों को अस्वीकार कर दिया। तीनों आरोपी गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई ने रामवीर सिंह को 22 जुलाई, सोनू कुमार को 26 जुलाई और बृज कुमार राम को 17 अगस्त को गिरफ्तार किया था। इसके बाद आरोपियों ने अदालत में जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत नहीं मिली।
डायरी और डिजिटल साक्ष्यों पर अदालत का जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी, सह-अभियुक्तों के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का अध्ययन किया। अदालत ने माना कि इन सामग्रियों से प्रथम दृष्टया ओएमआर शीट में कथित हेरफेर और परीक्षा व्यवस्था में साजिश के संकेत मिलते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली संगठित गड़बड़ी से केवल राज्य को वित्तीय नुकसान नहीं होता, बल्कि हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसी घटनाओं से चयन प्रणाली की निष्पक्षता और आम लोगों के विश्वास को भी गहरी ठेस पहुंचती है।
ओएमआर शीट में हेरफेर का आरोप
मामले की जांच कर रही एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया का गलत लाभ उठाकर कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़, परीक्षा संबंधी सूचनाओं के दुरुपयोग और अलग-अलग लोगों की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई गई। जांच के क्रम में मिले तकनीकी तथा दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर तीनों को गिरफ्तार किया गया था।
हजारों अभ्यर्थियों से जुड़ा है मामला
जेपीएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्था की परीक्षाओं में अनियमितता के आरोपों ने राज्य के अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। वर्षों तक मेहनत करने वाले उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ का कोई भी आरोप बेहद संवेदनशील माना जाता है। तीनों जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद अब मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।