
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम की महिला उद्यमियों को स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर राज्य और राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की गई है। इसी उद्देश्य से जिला समाहरणालय स्थित सभागार में झारखंड इनक्यूबेटर कार्यक्रम के तहत उद्यमी दीदियों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में उपायुक्त मनीष कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार समेत संबंधित अधिकारी एवं महिला उद्यमी शामिल हुईं। कार्यक्रम में महिला उद्यमियों को उनके व्यवसाय के विस्तार के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय अवसरों की जानकारी दी गई।
स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के प्रतिनिधि ने झारखंड इनक्यूबेटर कार्यक्रम के उद्देश्य, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, प्रशिक्षण, मेंटरिंग, बाजार से जुड़ाव, वित्तीय सहायता और व्यवसाय विस्तार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।
उद्यमी दीदियों को बताया गया कि कार्यक्रम के माध्यम से चयनित महिला उद्यमियों को व्यवसाय और क्षेत्र-विशेष प्रशिक्षण के साथ विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, बैंक एवं बाजार से जुड़ाव तथा उत्पादों के प्रचार-प्रसार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है।
उत्पादन के साथ पैकेजिंग और ब्रांडिंग भी जरूरी
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं केवल स्वयं सहायता समूहों तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कौशल और अनुभव को उद्यमिता में बदलकर सफल व्यवसाय खड़ा करें। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार की मांग और विपणन पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी इकाई में नोटबुक का निर्माण हो रहा है तो उसी संसाधन और बाजार तंत्र का इस्तेमाल कर फाइल, कैलेंडर, डायरी और अन्य उपयोगी स्टेशनरी उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं। इससे व्यवसाय का विस्तार करने और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जिला से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का लक्ष्य
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और जेएसएलपीएस की टीम को निर्देश दिया कि पात्र महिला उद्यमियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं की जानकारी देने के साथ आवेदन, प्रशिक्षण, बैंकिंग, बाजार और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय अनुशासन, सामूहिक कार्य और बचत की आदत विकसित हुई है। अब इसी आधार को उद्यमिता से जोड़कर उन्हें सफल व्यवसायी के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि एक महिला का सफल उद्यम केवल उसकी व्यक्तिगत आय नहीं बढ़ाता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त उद्यमी दीदियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।
झारखंड में राज्यव्यापी इनक्यूबेटर कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों को प्रशिक्षण, मेंटरिंग, वित्तीय एवं बाजार संपर्क, ब्रांडिंग और व्यवसाय विस्तार में सहायता देना है।
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