
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के भनगांव में शुक्रवार को एक हथिनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में हड़कंप मच गया। हथिनी का शव मिलने की सूचना पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
हथिनी की मौत का कारण स्पष्ट नहीं
बताया गया कि हथिनी मृत अवस्था में पाई गई। उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका तत्काल पता नहीं चल सका है। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई। टीम ने आसपास के क्षेत्र की भी जांच की। फिलहाल मौत के कारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वन विभाग की ओर से हथिनी के शव का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक वर्ष में करीब सात हाथियों की मौत
जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पिछले करीब एक वर्ष से जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। हाथियों के झुंड कई गांवों के आसपास पहुंचते रहे हैं। इस दौरान फसलों और घरों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले करीब एक वर्ष में क्षेत्र में करीब सात हाथियों की मौत होने की बात सामने आई है। लगातार हाथियों की मौत और उनकी बढ़ती गतिविधियों से ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है।
हाथी-मानव संघर्ष को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के गांवों में आने से फसल और संपत्ति के नुकसान के साथ जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी भय बना रहता है। हाथियों के झुंड के गांवों के आसपास पहुंचने पर ग्रामीणों को सतर्क रहना पड़ता है।
हथिनी की मौत के बाद भनगांव और आसपास के गांवों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
फिलहाल वन विभाग की टीम मामले की जांच में जुटी है। हथिनी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, बीमारी की वजह से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसका स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के आधार पर वन विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।