जमशेदपुर : टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल में टाटा समूह के भीतर विसलब्लोअर शिकायतों का आंकड़ा 12 हजार के पार पहुंच गया है। समूह की वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, इन शिकायतों में टाटा स्टील और टाटा मोटर्स से जुड़े कुल 3,758 मामले शामिल हैं। शिकायतों में सप्लाई चेन, खरीद प्रक्रिया, टेंडर आवंटन और आचार संहिता से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
टाटा स्टील में 2,646, टाटा मोटर्स में 1,112 शिकायतें
औद्योगिक नगरी जमशेदपुर की दो प्रमुख टाटा कंपनियों में ही हजारों शिकायतें दर्ज हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक टाटा स्टील में 2,646 और टाटा मोटर्स में 1,112 शिकायतें दर्ज की गईं। दोनों कंपनियों को मिलाकर शिकायतों की संख्या 3,758 है।
तीन साल में सामने आईं 80 प्रतिशत शिकायतें
रिपोर्ट के अनुसार समूह में दर्ज कुल शिकायतों का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान सामने आया। वित्त वर्ष 2022 में समूह में 1,323 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 3,500 तक पहुंच गया।
सप्लाई चेन और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा आपूर्ति श्रृंखला और परिचालन से जुड़ा रहा। इनमें सामग्री खरीद प्रक्रिया, ऑटो कंपोनेंट और कच्चे माल की आपूर्ति, टेंडर आवंटन में कथित विसंगतियां तथा ठेका श्रमिकों की बिलिंग से जुड़े विवाद शामिल बताए गए हैं। कुछ शिकायतों में टाटा आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप भी शामिल थे।
गोपनीय पोर्टल से जांच तक पहुंचती हैं शिकायतें
कंपनियों की ओर से शिकायतों के लिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा संचालित बहुभाषी गोपनीय पोर्टल, सुरक्षित ईमेल और 24 घंटे हेल्पलाइन की व्यवस्था बताई गई है। शिकायत दर्ज होने के बाद प्राथमिक समीक्षा की जाती है। पर्याप्त आधार मिलने पर फोरेंसिक और विजिलेंस विशेषज्ञों की टीम दस्तावेजों और खातों की स्वतंत्र जांच करती है।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई
जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार इसमें दोषी वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करना, टेंडर निरस्त करना और दोषी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने जैसी कार्रवाई शामिल है।



