
नीलांबर-पीतांबरपुर : लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के कुराईनपतरा गांव में सामाजिक कमेटी के कथित फरमान को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि समाज के सामूहिक आयोजन में मुर्गा-भात या खस्सी-भात नहीं खिलाने पर सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड की धमकी दी जाती है। मामले से नाराज आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण शुक्रवार को लेस्लीगंज थाना पहुंचे और पुलिस से शिकायत की।
मुर्गा-भात नहीं तो कार्रवाई का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक कुराईनपतरा में स्वर्णकार समाज के करीब 30 परिवार रहते हैं। समाज के करीब 30 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है। आरोप है कि प्रत्येक सदस्य से हर सप्ताह 20 रुपये जमा कराए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि गरीब कन्याओं की शादी और जरूरतमंदों की मदद के लिए जमा की जाती थी, लेकिन आरोप है कि इसका उपयोग कमेटी के पदाधारियों के निजी हित में किया जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए हर सामाजिक आयोजन में मुर्गा-भात या खस्सी-भात का इंतजाम करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद कथित तौर पर अपेक्षित भोजन नहीं कराने पर परिवारों पर दबाव बनाया जाता है और आर्थिक दंड की बात कही जाती है।
गरीब परिवारों पर ज्यादा सख्ती का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सामाजिक नियमों के नाम पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ अधिक सख्ती की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि समाज के नियमों के तहत किसके घर जाना है, किससे बात करनी है और किसके बारे में क्या कहना है, जैसी बातों को लेकर भी कथित तौर पर फैसले सुनाए जाते हैं।
ग्रामीणों ने कमेटी के अध्यक्ष अरुण सोनी, सचिव सत्यनारायण सोनी और कोषाध्यक्ष राजेंद्र सोनी समेत कमेटी से जुड़े लोगों पर कथित रूप से ऐसे फैसले लेने का आरोप लगाया है।
छह से ज्यादा ग्रामीण पहुंचे थाने
मामले को लेकर राहुल सोनी, जयमंगल सोनी, नरसिंह सोनी, उपेंद्र सोनी, बादल सोनी और सूरजमल सोनी समेत अन्य ग्रामीण लेस्लीगंज थाना पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कराने और कथित सामाजिक दबाव तथा आर्थिक दंड पर रोक लगाने की मांग की है।
कमेटी का पक्ष सामने नहीं आया
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित सामाजिक कमेटी का पक्ष खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक दंड और कमेटी की राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अब सवाल-समाज के नाम पर दबाव की सीमा क्या?
ग्रामीणों का कहना है कि समाज को जोड़ने के लिए बनाई गई व्यवस्था यदि गरीब परिवारों के लिए आर्थिक बोझ या सामाजिक दबाव का कारण बनती है, तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद अब ग्रामीणों की शिकायत और कमेटी के पक्ष की जांच अहम होगी।