
पुरुलिया/बलरामपुर : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर प्रखंड अंतर्गत भालुबासा गांव में रविवार को आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास और समाज कल्याण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘उपहार और जागरूकता ही हमारा लक्ष्य’ संदेश के साथ समाजसेवी संस्था रूरल आदिवासी ट्रस्ट ने ग्रामीणों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंचाया।
शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, कई मुद्दों पर जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को शिक्षा के महत्व, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नारी शिक्षा व सुरक्षा, बाल विवाह की रोकथाम और नशा मुक्ति को लेकर जागरूक किया गया। इसके साथ ही डेंगू और सर्पदंश से बचाव के उपायों की भी जानकारी दी गई।
आयोजकों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाएं।
संथाली गीतों से दिया जागरूकता का संदेश
जागरूकता कार्यक्रम को ग्रामीणों के लिए सहज और प्रभावी बनाने के लिए तथ्यपूर्ण चर्चा के साथ संथाली गीतों का भी आयोजन किया गया। गीतों और संवाद के माध्यम से सामाजिक जागरूकता के संदेश को ग्रामीणों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के बाद उपस्थित ग्रामीणों के बीच साबुन, चप्पल और अन्य उपयोगी उपहार सामग्री का वितरण किया गया। इससे ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला।
अनाथ आश्रम और स्वास्थ्य केंद्र बनाने की योजना
ट्रस्ट के फाउंडर धनंजय मुर्मू ने बताया कि घाटबेड़ा-केरवा के बाद भालुबासा गांव में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। संस्था का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी समाज के बीच लगातार जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में सरकारी सहयोग से अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम और स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
ग्रामीणों ने की ट्रस्ट के प्रयास की सराहना
कार्यक्रम में ट्रस्ट की ओर से संस्थापक सदस्य धनंजय मुर्मू, बैद्यनाथ टुडू, ईश्वर सोरेन, रामचांद मुर्मू, कालीपद मुर्मू, मनिंद्र टुडू, सूर्य सोरेन, सुचांद हेम्ब्रम, मिहिरलाल टुडू और अमूल्य हांसदा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
ट्रस्ट की ओर से लगातार किए जा रहे जागरूकता और समाजसेवा के प्रयासों की स्थानीय ग्रामीणों ने सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से गांव के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी मिलती है।