
जमशेदपुर : नो-एंट्री में वाहन लेकर जाना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। आरोप है कि चालान काटने के बजाय ट्रैफिक सिपाही ने उससे डिजिटल तरीके से रुपये मंगवाए। खास बात यह रही कि पीड़ित के पास नकद रुपये नहीं होने पर पास में मौजूद एक सब्जी विक्रेता के यूपीआई स्कैनर का इस्तेमाल कराया गया। पीड़ित के अनुसार उसके मोबाइल से सब्जी विक्रेता के QR कोड पर 520 रुपये ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद सब्जी विक्रेता ने 20 रुपये अपना कमीशन काटकर 500 रुपये नकद सिपाही को दे दिए।
मामला साकची थाना क्षेत्र का है। सिदगोड़ा बारा रोड निवासी अरुण कुमार, जो एक कंपनी में कर्मचारी हैं, ने इस संबंध में एसएसपी को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
पत्नी के साथ पुराने कोर्ट गए थे, लौटते समय नो-एंट्री में पहुंचे
अरुण कुमार के अनुसार वह अपनी पत्नी के साथ पुराने कोर्ट में एसआइआर में सुधार कराने गए थे। वहां से लौटने के दौरान साकची में उनकी गाड़ी वन-वे/नो-एंट्री मार्ग में चली गई। उनका कहना है कि उन्हें वहां लागू नो-एंट्री व्यवस्था की जानकारी नहीं थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सिपाही ने उनकी गाड़ी रोक ली।
पहले मांगे 1000 रुपये, कैश नहीं होने पर निकाला QR का रास्ता
शिकायत के अनुसार सिपाही ने नो-एंट्री में जाने के लिए 1000 रुपये जुर्माने की बात कही। अरुण ने बताया कि उनके पास उस समय नकद रुपये नहीं थे। आरोप है कि इसके बाद सिपाही ने पास में मौजूद एक सब्जी विक्रेता के यूपीआई स्कैनर पर रुपये ट्रांसफर करने को कहा।
अरुण के मोबाइल से सब्जी विक्रेता के QR कोड पर 520 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद सब्जी विक्रेता ने 20 रुपये अपने पास रखकर बाकी 500 रुपये सिपाही को नकद दे दिए।
सबसे बड़ा सवाल : अगर जुर्माना था तो रसीद क्यों नहीं?
अरुण कुमार का आरोप है कि उनसे रुपये लेने के बाद उन्हें चालान या जुर्माने की कोई रसीद नहीं दी गई। इसी बिंदु को लेकर उन्होंने एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मामले में अब यह जांच का विषय है कि संबंधित स्थान पर उस समय नो-एंट्री उल्लंघन के लिए कितना आधिकारिक जुर्माना निर्धारित था, क्या पीड़ित के वाहन का कोई ई-चालान काटा गया और यदि जुर्माना लिया गया था तो उसकी आधिकारिक रसीद क्यों नहीं दी गई।
QR से भुगतान से लेकर नकद देने तक की कड़ी जांच का विषय
शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुताबिक घटना में डिजिटल भुगतान का माध्यम तो इस्तेमाल हुआ, लेकिन रकम अंततः नकद में सिपाही तक पहुंची। इसलिए 520 रुपये के यूपीआई ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड, सब्जी विक्रेता का बयान और संबंधित सिपाही की ड्यूटी जांच में अहम साक्ष्य हो सकते हैं।
अरुण कुमार ने एसएसपी से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अब पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान से ही स्पष्ट होगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ था।
आम लोगों के लिए भी बड़ा सवाल
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होने पर आम तौर पर आधिकारिक चालान की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में यदि किसी वाहन चालक से जुर्माने के नाम पर पैसा लिया जाता है तो उसे आधिकारिक रसीद मिलना और रकम सरकारी प्रक्रिया के तहत जमा होना जरूरी है। साकची की इस शिकायत ने ट्रैफिक कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा किया है।
नोट : खबर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी।