
- 11 महीने से मानदेय नहीं मिलने का संघ का दावा, भुगतान की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल; 99 केंद्रों में जारी रहा काम, सोनारी से मानगो तक दिखा असर
जमशेदपुर : मानदेय और पोषाहार की राशि लंबित रहने के विरोध में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की हड़ताल का असर शुक्रवार को जमशेदपुर में दिखा। शहर के 89 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके रहे। इसके कारण करीब 2500 बच्चों को पोषाहार नहीं मिल सका। वहीं, 99 केंद्रों में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा। इससे हड़ताल का असर शहर में मिला-जुला रहा।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुड़े आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने मानदेय और पोषाहार की राशि का भुगतान नहीं होने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। संघ का दावा है कि सेविकाओं और सहायिकाओं को पिछले 11 महीने से मानदेय नहीं मिला है। पोषाहार की राशि भी कई महीने से लंबित है। संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्र पहुंचे बच्चे, ताला देखकर लौटना पड़ा
हड़ताल का असर सोनारी से मानगो तक कई इलाकों में देखने को मिला। सोनारी की बिरसा बस्ती, बाराद्वारी के गांधी आश्रम और कुम्हारपाड़ा सहित आजादनगर रोड नंबर 17 के तेजाब तालाब क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके रहे। सुबह केंद्र पहुंचे बच्चों को बिना पोषाहार मिले वापस लौटना पड़ा।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोषाहार देने के साथ उनकी शुरुआती देखभाल और विकास से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होती हैं। ऐसे में केंद्र बंद रहने से बच्चों को मिलने वाली नियमित सेवाएं प्रभावित हुईं।
11 महीने से मानदेय नहीं मिलने का दावा
भारतीय मजदूर संघ आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष बिंदु कुमारी ने कहा कि सेविकाएं लंबे समय से मानदेय के भुगतान की मांग कर रही हैं। पोषाहार की राशि भी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलन के दौरान बीएलओ के रूप में काम नहीं करने की भी बात कही गई।
99 केंद्र खुले, हड़ताल में दिखा मतभेद
शहर के सभी आंगनबाड़ी केंद्र हड़ताल में शामिल नहीं हुए। जहां 89 केंद्र बंद रहे, वहीं 99 केंद्रों पर नियमित गतिविधियां चलती रहीं। हड़ताल को लेकर सेविकाओं के अलग-अलग रुख के कारण स्थिति एक जैसी नहीं रही।
हड़ताल में शामिल नहीं होने वाली कुछ संचालिकाओं का कहना था कि मुख्यमंत्री की माता के निधन के बाद ऐसे समय में हड़ताल करना उचित नहीं लगता। इसी वजह से कुछ केंद्र खुले रहे, जबकि अन्य केंद्रों पर ताले लटके रहे।
भुगतान और पोषाहार पर विभाग की प्रतिक्रिया अहम
आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगों और बच्चों को मिलने वाली सेवाओं के प्रभावित होने के बीच अब मानदेय तथा पोषाहार की लंबित राशि के भुगतान पर सबकी नजर है। विभाग की ओर से बकाया राशि की स्थिति और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट होने से ही विवाद के समाधान की दिशा सामने आ सकेगी।