
- कुकरू में औद्योगिक पार्क बनाने की तैयारी तेज, जियाडा ने शुरू किया जमीन का भौतिक सत्यापन; 1960 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने की योजना नहीं हो सकी थी पूरी, अब जमीन के इस्तेमाल पर नई पहल।
सरायकेला-खरसावां : करीब 14 साल से खाली पड़ी टाटा पावर की सैकड़ों एकड़ जमीन का अब औद्योगिक इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद जगी है। सरायकेला-खरसावां जिले के कुकरू प्रखंड में इस जमीन पर औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना और निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
टाटा पावर की 436.93 एकड़ अधिग्रहित जमीन को लेकर झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी प्रबंधन की ओर से जमीन हैंडओवर करने की इच्छा जताए जाने के बाद जियाडा की टीम ने स्थल का भौतिक सत्यापन शुरू किया है। सत्यापन रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे रांची स्थित मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद सरकार की मंजूरी और आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा।
1960 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने की थी योजना
टाटा पावर ने कुकरू प्रखंड में 436.93 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण किया था। इस जमीन पर 1960 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने की योजना थी। हालांकि, वर्ष 2012 से अधिग्रहित जमीन पर कंपनी पावर प्लांट स्थापित नहीं कर पाई।
अब लंबे समय से खाली पड़ी इस जमीन के इस्तेमाल को लेकर नई पहल की जा रही है। औद्योगिक पार्क का प्रस्ताव आगे बढ़ने पर इस जमीन का उपयोग नए उद्योगों की स्थापना के लिए किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कंपनी ने जियाडा को लिखा पत्र, शुरू हुआ सत्यापन
जमीन के नए इस्तेमाल की दिशा में कंपनी प्रबंधन ने झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को पत्र भेजकर जमीन हैंडओवर करने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद जियाडा ने एक टीम गठित कर जमीन का भौतिक सत्यापन शुरू कराया।
जियाडा का क्षेत्रीय कार्यालय सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजेगा। इस रिपोर्ट में जमीन की वास्तविक स्थिति और औद्योगिक पार्क के प्रस्ताव से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
टाटा पावर को किस दर से मिलेगा भुगतान?
औद्योगिक पार्क के प्रस्ताव में जमीन के हस्तांतरण के साथ उसके बदले भुगतान की दर भी अहम होगी। जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन के अनुसार, कुकरू में औद्योगिक पार्क के प्रस्ताव को मुख्यालय भेजा जाएगा। इसके बाद मुख्यालय स्तर पर यह तय करने की प्रक्रिया होगी कि 436.93 एकड़ जमीन के बदले टाटा पावर को किस दर से भुगतान किया जाएगा।
भुगतान की दर और अन्य जरूरी पहलुओं पर निर्णय होने के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। फिलहाल जमीन के सत्यापन और प्रस्ताव को मुख्यालय तक पहुंचाने पर जोर है।
उद्योगों को जमीन मिली तो बढ़ेंगे निवेश के अवसर
कुकरू में औद्योगिक पार्क विकसित होने से नए उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों को जमीन उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ेगी। मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार के लिए भी नए विकल्प खुल सकते हैं।
औद्योगिक पार्क में निवेश आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने, परिवहन और अन्य सहायक कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ये संभावनाएं परियोजना की मंजूरी, बुनियादी सुविधाओं के विकास और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेंगी।
अब सरकार की मंजूरी पर टिकी निगाहें
फिलहाल औद्योगिक पार्क का प्रस्ताव शुरुआती प्रक्रिया में है। जियाडा की टीम भौतिक सत्यापन के बाद रिपोर्ट मुख्यालय भेजेगी। इसके बाद सरकार की मंजूरी और जमीन हस्तांतरण से जुड़े फैसलों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
करीब 14 साल से खाली पड़ी इस जमीन का औद्योगिक इस्तेमाल शुरू हो पाता है या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कुकरू क्षेत्र में नए उद्योगों और निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है।
खबर के मुख्य बिंदु
- –कुकरू प्रखंड में औद्योगिक पार्क बनाने का प्रस्ताव
- टाटा पावर की 436.93 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर नई पहल।
- पहले यहां 1960 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने की योजना थी।
- जियाडा की टीम ने जमीन का भौतिक सत्यापन शुरू किया।
- जमीन के बदले भुगतान की दर और सरकारी मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।