
- 1945 से 2015 तक जारी प्रमाणपत्रों के कागजी रिकॉर्ड का होगा डिजिटलीकरण, दस्तावेजों के खराब होने और गुम होने का खतरा होगा कम।
- जेएनएसी की पहल से पुराने रिकॉर्ड खोजना होगा आसान, प्रशासनिक कामकाज में भी आएगी तेजी।
जमशेदपुर : शहर में सात दशक पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की दिशा में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने पहल शुरू की है। इसके तहत वर्ष 1945 से 2015 तक जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के कागजी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से लगभग 10.50 लाख पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की तैयारी है। इससे समय के साथ पुराने दस्तावेजों के फटने, खराब होने या गुम होने की आशंका कम होगी। साथ ही, भविष्य में जरूरत पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी प्राप्त करना भी आसान हो सकेगा।
70 साल पुराने रिकॉर्ड को सहेजने की पहल
जमशेदपुर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से संबंधित पुराने रिकॉर्ड लंबे समय से कागजी दस्तावेजों के रूप में रखे जा रहे हैं। समय बीतने के साथ इन दस्तावेजों के रखरखाव की चुनौती भी बढ़ती है। पुरानी फाइलों में किसी प्रमाणपत्र से संबंधित जानकारी तलाशने में समय और मेहनत लग सकती है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए जेएनएसी ने पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत वर्ष 1945 से 2015 तक के रिकॉर्ड को डिजिटल डेटाबेस में दर्ज करने की योजना है। इससे पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
हर साल जारी होते हैं 15 हजार प्रमाणपत्र
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र में हर साल औसतन 15 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। इस औसत के आधार पर पिछले सात दशकों में जारी प्रमाणपत्रों की संख्या लगभग 10.50 लाख आंकी गई है।
इतनी बड़ी संख्या में पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखना नगर निकाय के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटलीकरण के बाद इन रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से रखने और जरूरत के अनुसार संबंधित जानकारी खोजने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, 10.50 लाख रिकॉर्ड की संख्या एक अनुमान है। वास्तविक संख्या पुराने रजिस्टरों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद स्पष्ट होगी।
प्रशासनिक कामकाज में आएगी तेजी
पुराने कागजी रिकॉर्ड में किसी दस्तावेज से जुड़ी जानकारी खोजने के लिए संबंधित रजिस्टर या फाइल तक पहुंचना पड़ता है। इसके कारण कई बार प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है। डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से रिकॉर्ड की खोज और प्रबंधन को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
इस पहल से नगर निकाय के कर्मचारियों को पुराने दस्तावेजों से संबंधित जानकारी जुटाने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, रिकॉर्ड प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिल सकती है।
नागरिकों को क्या होगा फायदा?
पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र कई तरह के प्रशासनिक और पारिवारिक कार्यों में उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे में दशकों पुराने रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना महत्वपूर्ण है। डिजिटलीकरण से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी खोजने में आसानी हो सकती है और पुराने दस्तावेजों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने का अर्थ यह नहीं है कि नागरिकों को प्रमाणपत्र तत्काल ऑनलाइन मिलने लगेंगे। इसके लिए ऑनलाइन सुविधा और प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित व्यवस्था की अलग से पुष्टि जरूरी होगी।
मुख्य बातें:
• रिकॉर्ड की अवधि: 1945 से 2015 तक।
• अनुमानित रिकॉर्ड: लगभग 10.50 लाख।
• हर साल जारी प्रमाणपत्र: औसतन 15 हजार।
• मुख्य उद्देश्य: पुराने दस्तावेजों का डिजिटल संरक्षण और रिकॉर्ड प्रबंधन को आसान बनाना।