
जमशेदपुर : टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में बाघ परिवार के तीन नए सदस्यों का स्वागत हुआ है। बाघिन सुनैना ने 23 सितंबर, 2026 की सुबह तीन शावकों को जन्म दिया, जिनमें दो मादा और एक नर हैं। अब चिड़ियाघर प्रबंधन ने शहरवासियों को इन नन्हे मेहमानों के नामकरण में शामिल होने का अवसर दिया है। लोग 19 अक्टूबर तक नाम भेज सकते हैं। चुने गए सुझावों के लिए विजेताओं को निःशुल्क प्रवेश पास और स्मृति चिह्न दिया जाएगा।
सुनैना पहली बार बनी मां, रुद्र है पिता
चिड़ियाघर की ओर से 14 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, सुनैना पहली बार मां बनी है। तीनों शावकों के पिता रुद्र को नागपुर के गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर से टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क लाया गया था।शावकों के जन्म के बाद शुरुआती देखभाल और निगरानी को प्राथमिकता दी गई। निर्धारित नियमों के तहत यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद जन्म की जानकारी सार्वजनिक की गई है। बाघ परिवार में तीन नए सदस्यों का जुड़ना चिड़ियाघर और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी का अवसर है।
घायल मादा शावक की हालत में सुधार
पहली बार मातृत्व संभाल रही सुनैना से अनजाने में एक मादा शावक को चोट लग गई थी। पशु चिकित्सकों ने तुरंत उपचार किया और उसके घाव पर टांके लगाए। चिड़ियाघर के अनुसार, उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। इस मादा शावक का वजन फिलहाल लगभग 1.8 किलोग्राम है। वह खतरे से बाहर है, लेकिन चिकित्सकीय निगरानी जारी है। उसकी सेहत में होने वाले बदलावों पर डॉक्टर लगातार नजर रख रहे हैं।
दो शावक स्वस्थ, कैमरों से भी निगरानी
बाकी दोनों शावक स्वस्थ हैं। नर शावक का वजन करीब 2.9 किलोग्राम, जबकि दूसरी मादा का वजन लगभग 2.53 किलोग्राम बताया गया है। तीनों की देखभाल में चिकित्सकों की नियमित निगरानी के साथ सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ली जा रही है। कैमरों से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। प्रबंधन के मुताबिक, शावकों की सेहत और सुरक्षा के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।
तीनों के लिए सुझाएं एक-एक नाम
नामकरण प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए लोगों को दो मादा और एक नर शावक के लिए एक-एक नाम सुझाना है। सुझाव WhatsApp अथवा मोबाइल मैसेज के जरिए +91 9438291637 पर भेजे जा सकते हैं। नाम भेजने की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर, 2026 है।
चिड़ियाघर की गठित टीम तीन सर्वश्रेष्ठ सुझावों का चयन करेगी। विजेताओं को निःशुल्क प्रवेश पास और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। प्रबंधन को उम्मीद है कि शहरवासी इस पहल में उत्साह से भाग लेंगे। नामकरण के जरिए लोगों को चिड़ियाघर से अपना जुड़ाव बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।