जमशेदपुर: शिक्षा के मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान का सवाल एक बार फिर चर्चा में है। जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बकाया वेतन और देय बोनस की मांग को लेकर कर्मचारी संघ ने आवाज बुलंद की है। कर्मचारियों का आरोप है कि अपने श्रम का उचित मूल्य मांगने पर उन्हें दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को सिदगोड़ा स्थित स्वर्णरेखा ऑडिटोरियम में शिक्षकतर कर्मचारी संघ की बैठक में इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कर्मचारियों के अधिकार, संस्थागत स्वाभिमान, वित्तीय पारदर्शिता और संगठन के विस्तार जैसे विषय प्रमुखता से उठे।
वेतन और बोनस मांगने पर दबाव बनाने का आरोप
बैठक में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारियों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिलना चाहिए। बकाया वेतन और देय बोनस की मांग करना उनका अधिकार है। इसके लिए कर्मचारियों पर कथित तौर पर दबाव बनाना या उन्हें डराना उचित नहीं है। संघ ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों की मांग को अनुशासनहीनता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारों का अर्थ मनमानी नहीं है। कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनकी समस्याओं का निष्पक्ष समाधान जरूरी है। संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या विश्वविद्यालय प्रशासन से टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि पारदर्शी और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है।
हक और आत्मसम्मान से समझौता नहीं
बैठक में कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि अपने श्रम का उचित मूल्य मांगना या लागू नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाओं की मांग करना गलत नहीं है। संघ का कहना है कि अनुशासन का अर्थ भय का वातावरण बनाना नहीं, बल्कि नियमों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना है।
कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों को लेकर संघ ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हर कर्मचारी की आवाज सुनी जानी चाहिए। संगठन ने पारदर्शिता, संवाद और निष्पक्षता के आधार पर समस्याओं का समाधान निकालने पर जोर दिया।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी मिला प्रतिनिधित्व
बैठक में संगठन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। अब आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी शिक्षकतर कर्मचारी संघ में शामिल किया गया है। उनके लिए 100 रुपये प्रति माह सदस्यता शुल्क निर्धारित किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से तपन कुमार मोदक को आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का अधिकृत प्रतिनिधि चुना गया। संघ का मानना है कि अलग-अलग सेवा शर्तों के बावजूद सभी कर्मचारियों के श्रम और सम्मान का महत्व समान है। संगठन में प्रतिनिधित्व मिलने से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की समस्याओं को औपचारिक रूप से उठाने का रास्ता मजबूत होगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खोलने का प्रस्ताव
वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए संघ ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में संचालित अपने वर्तमान खाते को बदलकर बैंक ऑफ बड़ौदा में नया खाता खोलने का प्रस्ताव रखा। बताया गया कि पदाधिकारियों के नाम में बदलाव, संस्थान के नाम में सुधार और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं को लेकर आ रही दिक्कतों के मद्देनजर यह कदम उठाने पर विचार किया गया।
वेतन से सीधे सदस्यता शुल्क काटने की पुरानी व्यवस्था बंद होने के बाद कर्मचारियों को अब कोषाध्यक्ष के पास या डिजिटल माध्यम से सदस्यता शुल्क जमा करने की सुविधा उपलब्ध होगी।
राज्यस्तरीय महासंघ से जुड़ने की तैयारी
बैठक में झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ तथा झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से जुड़ने की जानकारी भी दी गई। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्यस्तरीय संगठन से जुड़ने पर वेतन, पदोन्नति, सेवा सुरक्षा और कर्मचारियों से संबंधित नीतिगत समस्याओं को व्यापक मंच पर उठाने में मदद मिलेगी।
बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष गंगाधर नाग ने की। सचिव सीमा तिर्की की मौजूदगी में औपचारिक कार्यवाही शुरू हुई। उपाध्यक्ष चैतन्य शिरोमणि ने प्रारंभिक संबोधन किया। बैठक में कोषाध्यक्ष लक्ष्मी जाल, अशोक भट्टाचार्य, शंकर दास, मनीष दास, रामबालक भगत, नारायण नाग, तुलसी बाग और सुजाता मुखी सहित कई कर्मचारी उपस्थित रहे।
एकजुटता से अधिकारों की लड़ाई मजबूत करने का संकल्प
बैठक के अंत में संघ ने कर्मचारियों की एकजुटता को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताया। पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद और पारदर्शिता से होना चाहिए। संगठन आगे भी कर्मचारियों के हितों और सम्मान से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा।
हालांकि, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के बकाया वेतन और बोनस की स्थिति, कथित दबाव के आरोपों तथा इन मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इन सवालों पर प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
सवाल यही है कि कर्मचारियों के बकाया भुगतान और उनकी शिकायतों का समाधान कब होगा? अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है।




