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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- aksharsamvad.com
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जमशेदपुर की ‘स्नेक कैचर’ रजनी अभी तक 2,000 से ज्यादा सांपों का किया रेस्क्यू कर चुकी हैं

खौफ को मात देता हौसला ——हेडिंग

अक्षर संवाद

सांप का नाम सुनते ही लोग डर से कांप उठते हैं, लेकिन जमशेदपुर की 55 वर्षीय रजनी लायल बिना किसी डर के जहरीले सांपों को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ देती हैं। पिछले 10 वर्षों से रजनी लगातार सांपों का रेस्क्यू कर रही हैं और अब तक 2,000 से ज्यादा सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ चुकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उनकी यह कहानी साहस, सेवा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल बनकर सामने आती है।

एक फोन कॉल पर पहुंच जाती हैं रजनी

जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में जब भी किसी के घर, कोई बस्ती या खेत में सांप निकलने की सूचना मिलती है, तो लोग सबसे पहले रजनी को फोन करते हैं। सूचना मिलते ही रजनी तुरंत मौके पर पहुंचती हैं और बिना घबराए सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ देती हैं।

रजनी का कहना है कि सांप प्रकृति के लिए बेहद जरूरी होते हैं, इसलिए उन्हें मारना नहीं चाहिए बल्कि सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करना चाहिए।

58 किलो के अजगर का किया सबसे बड़ा रेस्क्यू

रजनी बताती हैं कि हाल ही में उन्होंने करीब 58 किलो वजन के एक अजगर का रेस्क्यू किया था, जो उनके जीवन का अब तक का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन था। इस दौरान लोगों की भारी भीड़ जुट गई थी, लेकिन रजनी ने धैर्य और साहस के साथ अजगर को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।

समाज के लिए प्रेरणा

रजनी का मानना है कि अगर हौसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। आज वो न केवल लोगों की जान बचा रही हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण का भी बड़ा संदेश दे रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर रजनी की यह कहानी समाज की हर महिला के लिए प्रेरणा है। इस प्रेरणादाई कहानी से यही संदेश मिलता है कि साहस और लगन से किसी भी क्षेत्र में अलग पहचान बनाई जा सकती है।

सांप प्रकृति के लिए जरूरी हैं, इसलिए उन्हें मारना नहीं चाहिए, बल्कि रेस्क्यू करना चाहिए–रजनी लायल

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