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'अरुष' की खालसा स्कूल परिसर मे गाड़ी से कुचल कर मौत मामले मे अब तक गिरफ्तारी नही! - aksharsamvad.com
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जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में हाल के दिनों में दो दर्दनाक घटनाओं ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन इन दोनों घटनाओं के बाद समाज की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई में जो अंतर देखने को मिला, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

पहली घटना में मेहदी कुमारी के ऊपर चाय फेंककर हमला किया गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गईं। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़कों पर प्रदर्शन हुए, सोशल मीडिया पर आवाज़ उठी और “जस्टिस फॉर मेहदी” की मांग तेज़ हो गई। यह देखना सकारात्मक था कि समाज अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हुआ।

लेकिन दूसरी ओर, एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। वर्मामाइंस स्थित खालसा स्कूल परिशर मे छुट्टी के समय एक तीन साल के मासूम बच्चे को एक कार चालक ने कुचल दिया। मासूम की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना जितनी दुखद है, उतनी ही चिंताजनक बात यह है कि अब तक आरोपी चालक की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

बच्चे के परिजन आज भी न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं। उनकी आँखों में आंसू हैं, दिल में दर्द है और मन में सिर्फ एक सवाल—“क्या हमारे बच्चे की जान की कोई कीमत नहीं?”

इन दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखा जाए तो समाज और सिस्टम की दो अलग तस्वीरें सामने आती हैं। एक तरफ तेज़ आवाज़ और त्वरित प्रतिक्रिया, तो दूसरी तरफ सन्नाटा और लापरवाही। क्या न्याय भी अब भीड़ और आवाज़ के हिसाब से तय होगा?

यह समय है आत्ममंथन का। प्रशासन को चाहिए कि वह हर मामले को समान गंभीरता से ले और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। वहीं समाज को भी यह समझना होगा कि हर पीड़ित को बराबर सहानुभूति और समर्थन मिलना चाहिए, चाहे मामला कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो।

न्याय सिर्फ एक के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए होना चाहिए, जो अन्याय का शिकार हुआ है। वरना यह असमानता समाज में अविश्वास और आक्रोश को जन्म देती रहेगी।

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