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अप्रैल 2025 से मानदेय नहीं, 38 हजार आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका भुखमरी की कगार पर; पोषाहार भी उधार पर - aksharsamvad.com
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कृति चंद्र गोप,सरायकेला 
झारखंड में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं की हालत दयनीय हो गई है। अप्रैल 2025 से अब तक राज्य की करीब 38,000 आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। नियमानुसार राज्य सरकार द्वारा 5,500 रुपये और केंद्र सरकार द्वारा 4,500 रुपये, यानी कुल 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। 13 महीने से भुगतान लंबित होने के कारण पूरे राज्य में सेविका-सहायिकाएं भुखमरी की कगार पर पहुंच गई हैं।
पोषाहार की राशि भी बकाया, उधारी पर चल रहे केंद्र
सिर्फ मानदेय ही नहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए प्रतिदिन मिलने वाले पोषाहार की राशि का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसके बावजूद सेविकाएं अपनी जेब से और उधारी पर राशन लेकर रोज बच्चों को पोषाहार खिला रही हैं। दुकानदारों की उधारी बढ़ने से अब राशन मिलना भी मुश्किल हो गया है। एक सेविका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “13 महीने से एक रुपया नहीं मिला। घर चलाना मुश्किल है। ऊपर से बच्चों को भूखा भी नहीं देख सकते, इसलिए उधार लेकर खिचड़ी-दलिया बनाते हैं। अब दुकानदार भी उधार देने से मना कर रहे हैं।”
सीडीपीओ की सूचना के बाद भी कार्रवाई नहीं
इस संबंध में विभिन्न जिलों के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) द्वारा कई बार समाज कल्याण विभाग को लिखित सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फंड आवंटन में तकनीकी अड़चन के कारण भुगतान रुका है।
आंदोलन की चेतावनी
झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका संघ ने नाराजगी जताई है। संघ की ओर से  कहा गया , “सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाली हम सेविकाओं को भूखा मार रही है। अगर 15 दिनों में बकाया भुगतान नहीं हुआ तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।आंगनबाड़ी सेविकाएं ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, टीकाकरण, गर्भवती लमहिलाओं की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा की रीढ़ हैं। मानदेय न मिलने से न सिर्फ उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति और पोषण कार्यक्रम भी चरमरा गया है।
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