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पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया का कहर: चार बच्चों की मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 100 डॉक्टरों की टीम तैनात - aksharsamvad.com
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जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पोटका प्रखंड समेत जिले में अब तक ब्रेन मलेरिया से चार बच्चों की मौत की पुष्टि जिला मलेरिया विभाग ने की है। समय पर इलाज नहीं मिलने और जागरूकता की कमी के कारण इन मासूमों की जान चली गई, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धावरिया ने बताया कि पोटका प्रखंड के सनग्राम गांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 13 वर्षीय छात्रा लक्खी सरदार की तबीयत बिगड़ने पर पहले स्थानीय अस्पताल, फिर सदर अस्पताल और बाद में एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन परिजन उसे झाड़-फूंक के लिए घर ले गए। हालत बिगड़ने के बाद 24 जून को एमजीएम अस्पताल लाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।

इसी तरह हितबासा गांव के 8 वर्षीय राहुल की भी तबीयत बिगड़ने पर उसे एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वहीं कांदर गांव की दो सगी बहनें अपनी मां के साथ एमजीएम अस्पताल में भर्ती थीं, जहां 26 जून को 7 वर्षीय सुबोला सरदार और 29 जून को एक वर्ष दो माह की खुशबू की मौत हो गई।
डॉ. धावरिया ने कहा कि यदि समय पर जांच और इलाज कराया जाता तो इन बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि पीएफ (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) मलेरिया का गंभीर रूप है, जिसे ब्रेन मलेरिया कहा जाता है और यह सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है। हालांकि इसका इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन समय पर उपचार बेहद जरूरी है। वर्तमान में एमजीएम अस्पताल में 20 से अधिक और सदर अस्पताल में करीब 50 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि पोटका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कई मरीज भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास जांच किट और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है। स्वास्थ्य विभाग ने आशंका जताई है कि कुछ दिन पहले पोटका के हरिणा में लगे मेले में बाहर से आए लोगों के कारण संक्रमण फैला हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में युद्धस्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। पोटका, मुसाबनी, घाटशिला और डुमरिया प्रखंड में 100 डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। जिला सिविल सर्जन डॉ. साहिर पॉल के अनुसार, 24 विशेष स्वास्थ्य टीमें गांव-गांव जाकर रक्त जांच, दवा वितरण और मरीजों का उपचार कर रही हैं। केवल पोटका में ही 17 डॉक्टरों की टीम घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही है। साथ ही नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता अभियान के जरिए लोगों को बुखार होने पर तत्काल जांच कराने, जलजमाव रोकने और मच्छरदानी के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, सिरदर्द, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और झाड़-फूंक के बजाय चिकित्सकीय उपचार को प्राथमिकता दें।

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