सहरसा: बिहार में एक साथ 10 पुलिस कर्मियों की सस्पेंड किया गया है। सहरसा जिले के सलखुआ थाना में कथित दलाली और मादक पदार्थों से जुड़े नेटवर्क के खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। कोशी प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कुमार आशीष की अगुवाई में हुई औचक जांच के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 10 पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसमें सलखुआ थाना के थानाध्यक्ष भी शामिल है। वहीं मामले में एक कथित दलाल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सलखुआ थाना में कुछ लोगों द्वारा पुलिस के नाम पर अवैध वसूली और दलाली किए जाने की शिकायत लगातार मिल रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी कुमार आशीष स्वयं थाना पहुंचे और पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष मुकेश कुमार और कथित दलाल सतीश कुमार के बीच मोबाइल पर लगातार संपर्क होने की बात सामने आने का दावा किया गया।
इसके बाद पुलिस टीम ने गोसपुर मंदिर के समीप छापेमारी कर सतीश कुमार को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक लैपटॉप, की-बोर्ड, माउस, चार्जर के अलावा पिपरा, सलखुआ और नवहट्टा थाना की मूल कांड डायरी बरामद होने का दावा किया गया। पुलिस के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों का किसी बाहरी व्यक्ति के पास मिलना बेहद गंभीर मामला है। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए सिमरी बख्तियारपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस ने सलखुआ थाना कांड संख्या 107/26 दर्ज कर आरोपी सतीश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। डीआईजी कुमार आशीष ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 10 पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, दलाली या अपराधियों से मिलीभगत किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी थाना या पुलिस कार्यालय में कोई व्यक्ति पुलिस के नाम पर दलाली करता है या अवैध गतिविधियों में संलिप्त दिखाई देता है, तो इसकी सूचना तुरंत वरीय अधिकारियों को दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और शिकायत सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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