चाकुलिया, पूर्वी सिंहभूम: चाकुलिया में जंगली हाथियों के आतंक और बिजली की लुका- छिपी से कल कारखाने बंद होने के कगार पर हैं। शाम होते ही जंगली हाथी प्रतिष्ठानों में घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर देते हैं। हाथियों के डर से मजदूर शाम 4:00 बजे छुट्टी कर घर चले जाते हैं। बिजली की लुका- छिपी भी परेशान करती है। कल कारखानों में उत्पादन घट रहा है। लागत बढ़ रहा है। हाथियों से संपत्तियों का भी भारी नुकसान हो रहा है। मजदूरों की जान भी जा सकती है। मजदूरों का पलायन हो रहा है। इससे निजात दिलाने के लिए चाकुलिया लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष दुर्गा दत्त लोधा ने सिंहभूम चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, जमशेदपुर के माध्यम से उद्योग विभाग के सचिव को पत्र लिखकर त्राहिमाम संदेश भेजा है।
पत्र में कहा गया है कि चाकुलिया झारखंड के दक्षिणी क्षेत्र में ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल की सीमा पर अवस्थित है। यहां छोटे-छोटे कल कारखाने हैं। परंतु विगत दो वर्षों से यहां के कल कारखानों में हाथियों का आतंक है। इससे यहां के कल कारखानों में कार्यरत मजदूर शाम 4:00 बजे ही छुट्टी कर चले जाते हैं। जिस इलाके में हाथी पहुंच जाते हैं, उस इलाकों के कल कारखानों में मजदूर कई दिनों तक कार्य करने नहीं आते हैं। हाथी कल कारखानों की बाउंड्री वॉल एवं अन्य संपत्तियों का भारी नुकसान हाथियों पहुंचा रहे हैं। कल कारखानों में कार्यरत मजदूरों की जान की भी क्षति होने की संभावना बनी है। इससे कल कारखानों के मालिकों एवं मजदूरों में भय एवं दहशत का माहौल है। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति भी बदहाल हो गई है। थोड़ी सी बरसात होने पर ही घंटों बिजली की आपूर्ति ठप हो जाती है। हर आधे-एक घंटे में बिजली का शटडाउन लिया जाता है। इससे कल कारखानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उत्पादन पर लागत बढ़ रहा है। उत्पादन करना भी मुश्किल है। इन समस्याओं की वजह से यहां के लघु श्रेणी में आने वाले कल कारखाने बंद होने के कगार पर हैं। यहां के मजदूर भी क्षेत्र से बाहर पलायन करने को बाध्य हो रहे हैं। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इन समस्याओं का समाधान अति शीघ्र किया जाय। ताकि यहां के कल कारखाने बंद ना हों एवं मजदूरों का पलायन भी नहीं हो।
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