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टेंडर और ठेकेदार तय, फिर भी ठप है कुकड़ू-ईचाडीह सड़क निर्माण - aksharsamvad.com
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विजय गोप, सरायकेला

सरकारी कागजों में सब कुछ दुरुस्त है। योजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ठेकेदार भी तय बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड में कुकड़ू से ईचाडीह तक 4.3 किलोमीटर सड़क का निर्माण डेढ़ साल से शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

₹2.84 करोड़ की योजना फाइलों में ही सिमटी
शिलान्यास सूची के क्रमांक 22 में कुकड़ू से ईचाडीह तक सड़क के सुदृढ़ीकरण कार्य का उल्लेख है। योजना के लिए करीब ₹2.84 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दर्ज है। लेकिन धरातल पर आज तक एक भी गिट्टी नहीं गिरी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि मंजूरी के बाद जर्जर सड़क की सूरत बदलेगी, लेकिन इंतजार लंबा होता गया।

बरसात में बदतर हुई सड़क, लोगों का जीना मुहाल
इस समय बरसात में सड़क की हालत और खराब हो गई है। जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ के कारण स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार छोटे वाहन फंस जाते हैं और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस और स्कूल वैन को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है, लेकिन खराब सड़क के कारण समय पर पहुंचना मुश्किल हो गया है।

शिलान्यास और प्रतिशत” के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी और ठेकेदार स्थानीय विधायक के हाथों शिलान्यास के बाद से ही काम शुरू करने की बात कर रहे हैं। वहीं कुछ ग्रामीणों ने प्रतिशत के कथित खेल का भी आरोप लगाया है? जिसके कारण योजना आगे नहीं बढ़ रही। हालांकि अखबार इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता।

सबसे बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
जब योजना स्वीकृत है, करोड़ों की राशि पास है और टेंडर भी हो चुका है, तो आखिर निर्माण शुरू करने में अड़चन कहां है?
क्या शिलान्यास जैसी औपचारिकता के चलते विकास कार्य को रोका जा सकता है? और अगर नहीं, तो डेढ़ साल से इस योजना को लटकाने के लिए जिम्मेदार कौन है?

ग्रामीणों की मांग – जांच हो, काम शुरू हो
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, देरी का कारण सार्वजनिक किया जाए और तत्काल सड़क निर्माण शुरू कराया जाए। ग्रामीणों ने साफ कहा – कागजों में योजना आगे बढ़ने से हमारी समस्या खत्म नहीं होगी। हमें सड़क पर काम चाहिए, भाषण नहीं। अब सबकी निगाह सड़क निर्माण विभाग पर है कि वह इस देरी पर क्या जवाब देता है और ₹2.84 करोड़ की इस स्वीकृत योजना को कब धरातल पर उतारता है।

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