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JSSC-CGL रद्द होने के बाद प्रोजेक्ट भवन में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, बोले- जांच करिए लेकिन निर्दोषों के साथ अन्याय मत कीजिए - aksharsamvad.com
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रांची: JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के बाद मामला और गरमा गया है। परीक्षा में सफल होकर नियुक्ति पाने वाले और अपने पदों पर योगदान देकर काम कर चुके अभ्यर्थी अब अपनी नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता और न्याय की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के पास जुटे और सरकार के फैसले के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, जांच की आड़ में उन अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति पाई और अपने पद पर काम भी किया।

जांच करिए, लेकिन हमारे साथ अन्याय मत कीजिए
प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी ने कहा कि वे किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर CBI जांच भी कराई जाए, लेकिन कुछ लोगों की गलती की सजा हजारों अभ्यर्थियों को नहीं मिलनी चाहिए।
अभ्यर्थी ने भावुक होकर कहा कि सरकार को जो जांच करानी है, कराए और जो दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करे, लेकिन उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति मिली और वे अपने पद पर काम भी कर रहे थे। अब अचानक परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

सरकार अपना फैसला वापस ले

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद उनका परिवार और भविष्य दोनों संकट में आ गए हैं। उन्होंने अपने माता-पिता से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि वे अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा रद्द करने से उन लोगों पर भी असर पड़ा है, जिनका किसी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को ही खत्म कर दिया जाना चाहिए।

हजारों निर्दोषों को क्यों मिले सजा?
प्रदर्शनकारी चंदा कुमारी ने कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि दोषी को सजा मिले, लेकिन निर्दोष को दंडित नहीं किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि परीक्षा रद्द करना क्या व्यवस्था को सुधारने का उचित तरीका है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी बात को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया। अब वे मीडिया के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं।

नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने भविष्य का सवाल
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ है, जो चयन प्रक्रिया पूरी कर सरकारी विभागों में योगदान दे चुके हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार उनकी स्थिति पर स्पष्ट आदेश जारी करे और यह सुनिश्चित करे कि जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति में व्यक्तिगत तौर पर कोई गलती नहीं है, उनके भविष्य के साथ अन्याय न हो।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और निर्दोष सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को लेकर जल्द स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

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