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नाइटक्लब अग्निकांड में लूथरा बंधुओं को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दो सप्ताह में करना होगा सरेंडर - aksharsamvad.com
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गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीन आरोपियों की जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

नई दिल्ली : गोवा के चर्चित नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सह-मालिक सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता को राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसके तहत तीनों आरोपियों की जमानत रद्द की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह मामला उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में 6 दिसंबर 2025 को हुई आग की घटना से जुड़ा है। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं तीनों याचिकाएं

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सोमवार को तीनों आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट का 18 अगस्त का फैसला प्रभावी बना रहेगा। पीठ ने निचली अदालत को आरोप तय करने की प्रक्रिया तेज करने और मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश भी दिया। तीनों आरोपियों को अप्रैल 2026 में सत्र अदालत से जमानत मिली थी। गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था।

बचाव पक्ष ने धारा 304 पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान लूथरा बंधुओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों के किसी प्रत्यक्ष कार्य के कारण यह घटना नहीं हुई। बचाव पक्ष ने गैर-इरादतन हत्या से संबंधित आईपीसी की धारा 304 भाग-दो लागू किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला अधिकतम कथित लापरवाही से हुई मौत की श्रेणी में आ सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर जमानत रद्द करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अजय गुप्ता के वकील के अनुरोध पर अदालत ने आत्मसमर्पण के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

हाई कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था पर जताई थी चिंता

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सत्र अदालत ने जांच के दौरान सामने आई सामग्री का उचित मूल्यांकन नहीं किया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि नाइटक्लब जरूरी लाइसेंस और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना संचालित हो रहा था तथा उसका निर्माण भी कथित रूप से अनधिकृत था। मामले में आरोप अभी न्यायालय में तय होने हैं। इसलिए तीनों व्यक्तियों को अंतिम फैसला आने तक आरोपी के रूप में ही उल्लेखित किया जाना उचित है।

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