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यूजीसी कानून वापस लेने और आरक्षण में आर्थिक आधार लागू करने की मांग को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।

धनबाद : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नए नियमों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को धनबाद में बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया गया। सवर्ण समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र-युवा समूहों के आह्वान पर निकाले गए दो अलग-अलग जुलूस रणधीर वर्मा चौक पहुंचे, जहां प्रदर्शनकारियों ने सभा कर अपनी मांगें उठाईं। आंदोलन से संबंधित ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम सौंपे जाने की बात भी कही गई।

दो स्थानों से निकले विरोध मार्च

पहला जुलूस जिला परिषद मैदान से प्रारंभ हुआ। राजपूत विचार मंच, ब्राह्मण समाज और कायस्थ समाज के संयुक्त नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। इस मार्च का नेतृत्व मंच के केंद्रीय अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, महासचिव एसके सिंह और समाजसेवी विजय झा सहित अन्य प्रतिनिधियों ने किया। दूसरा मार्च ‘अटल अभियान’ समिति तथा छात्र-युवा संगठनों के बैनर तले सिटी सेंटर से निकाला गया। इसका नेतृत्व समिति के डॉ. पीयूष पुष्कर सिंह और राहुल सिंह ने किया। दोनों रैलियां शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए रणधीर वर्मा चौक पहुंचीं, जहां वे एक बड़े प्रदर्शन में बदल गईं।

बारिश के बावजूद जारी रहा प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान हुई बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। हाथों में तख्तियां लेकर आगे बढ़ रहे लोगों ने यूजीसी नियम वापस लेने, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने, सभी वर्गों को समान अवसर देने और जातिगत भेदभाव समाप्त करने की मांग उठाई। चौक पर बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने दावा किया कि वर्तमान यूजीसी नियम विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए जिससे किसी वर्ग को अन्याय या भेदभाव का अनुभव हो। उनके अनुसार, सभी विद्यार्थियों को योग्यता, समानता और न्याय के सिद्धांत पर अवसर मिलना चाहिए।

गरीब परिवारों को मिले आरक्षण का लाभ

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरक्षण का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक पहुंचे, चाहे वे किसी भी जाति या समुदाय से संबंधित हों। वक्ताओं का कहना था कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बजाय जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता देने पर सामाजिक न्याय का उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा। आंदोलन में शामिल प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी से जुड़े विवादित प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं हुआ और आरक्षण सुधार की दिशा में पहल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को अधिक व्यापक तथा चरणबद्ध बनाया जाएगा।

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