
जमशेदपुर : होटल कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। एसआईटी की जांच में हत्या के पीछे जमीन विवाद, 15 लाख रुपये की सुपारी, दुमका जेल से कथित साजिश और उत्तर प्रदेश से बुलाए गए पेशेवर शूटर का कनेक्शन सामने आया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
दुमका जेल से शुरू हुई साजिश की कहानी
जांच के मुताबिक, निखार सबलोक की हत्या किसी अचानक हुए विवाद का परिणाम नहीं थी। इसके लिए पहले से योजना तैयार की गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने वाले पेशेवर शूटरों से संपर्क दुमका जेल के भीतर से स्थापित किया गया था।
हत्या के लिए करीब 15 लाख रुपये की सुपारी तय किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सुपारी की रकम किसने उपलब्ध कराई और शूटर तक यह रकम और निर्देश किस माध्यम से पहुंचे।
UP से आया था शूटर, निखार पर बरसाईं 11 गोलियां
वारदात के दिन निखार सबलोक की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। टाटा-रांची हाईवे स्थित होटल के पास उनकी मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद कथित शूटर अंकित सिंह ने उन पर फायरिंग कर दी।
पुलिस जांच के अनुसार, शूटर ने निखार पर 11 गोलियां चलाईं। हत्या के बाद वह मौके से फरार हो गया और रांची की ओर निकल गया। इसके बाद लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश की गई।
3.5 एकड़ जमीन बनी खूनी विवाद की वजह
पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा-आसनबनी मार्ग पर स्थित करीब 3.5 एकड़ जमीन बताई जा रही है। एनएच-33 के किनारे मौजूद इस बेशकीमती जमीन पर लंबे समय से विवाद चल रहा था। निखार सबलोक यहां एक बड़े होटल प्रोजेक्ट की तैयारी में थे। जांच में सामने आया है कि जमीन पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर अलग-अलग आपराधिक गुटों की दिलचस्पी बढ़ी।
इसी विवाद के बीच निखार को रास्ते से हटाने की साजिश तैयार किए जाने की आशंका है।
स्थानीय गिरोह से लेकर अंतरराज्यीय नेटवर्क तक जांच
निखार हत्याकांड ने पुलिस के सामने एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की तस्वीर रख दी है। जांच अब केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं है। एसआईटी की टीमें झारखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी छापेमारी कर चुकी हैं।
इससे पुलिस को यह संकेत मिला है कि वारदात के लिए शूटरों की व्यवस्था और उनके मूवमेंट में कई राज्यों से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है।
अशोक राघव का नाम भी जांच के केंद्र में
जांच में अशोक राघव उर्फ अशोक सिंह राघव का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विक्रम शर्मा की मौत के बाद उसके नेटवर्क को संभालने वाले लोगों में अशोक राघव का नाम प्रमुख रहा है।
हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उसे पुलिस कस्टडी में टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस उससे जुड़े नेटवर्क और निखार हत्याकांड में उसकी कथित भूमिका की जांच कर रही है।
सिंटू सिंह के चालक की गिरफ्तारी, फरार आरोपितों की तलाश
जांच में मानगो के अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह और संजीव सिंह समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस ने सिंटू सिंह के चालक सुनील रजक को गिरफ्तार किया है। वहीं अभिमन्यु और शिबू समेत फरार आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
सफेदपोश कनेक्शन की भी पड़ताल
एसआईटी अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर सुपारी की रकम जुटाने, शूटरों को बुलाने या वारदात के बाद उन्हें सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने में मदद की।
15 लाख की सुपारी से लेकर 3.5 एकड़ जमीन, दुमका जेल कनेक्शन और UP के शूटर तक, निखार हत्याकांड की जांच अब एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की ओर बढ़ती दिख रही है। पुलिस की आगे की जांच में इस मामले में और भी नाम सामने आने की संभावना है।