
जमशेदपुर : दलमा वन्यजीव आश्रयणी और इसके इको-सेंसिटिव जोन में कथित अवैध निर्माण को लेकर अब कार्रवाई तेज होने के संकेत हैं। जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इम्पावर्ड कमिटी (CEC) ने झारखंड सरकार को नियमों का उल्लंघन कर किए गए निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कमिटी ने दलमा के भीतर बने अवैध निर्माण हटाने के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को भी कहा है।
दलमा के भीतर बने निर्माणों पर कार्रवाई का निर्देश
सरयू राय के मुताबिक, दलमा वन्यजीव आश्रयणी के अंदर नियमों के विपरीत बनाए गए निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया गया है। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से दलमा बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में यहां निर्माण के लिए निर्धारित नियमों और सक्षम प्राधिकार से जरूरी अनुमति का पालन करना अनिवार्य है।
कमिटी के निर्देश के बाद अब वन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर टिक गई है। आने वाले दिनों में अवैध पाए गए निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
बिना NBWL की मंजूरी वाले टूरिज्म कॉटेज भी घेरे में
मामले का सबसे अहम पहलू दलमा के इको-सेंसिटिव जोन में बने टूरिज्म कॉटेज से जुड़ा है। सरयू राय के अनुसार, ऐसे कॉटेज भी कार्रवाई के दायरे में हैं, जिनका निर्माण राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) से आवश्यक NOC लिए बिना किए जाने का आरोप है।
अगर आवश्यक स्वीकृतियों के बिना निर्माण की पुष्टि होती है, तो संबंधित संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई हो सकती है। इससे दलमा क्षेत्र में चल रही पर्यटन गतिविधियों और उनसे जुड़े निर्माणों को लेकर भी नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं।
सिर्फ कॉटेज नहीं, जिम्मेदार अफसरों पर भी नजर
इस पूरे मामले में कार्रवाई का दायरा केवल निर्माणों तक सीमित रहने की बात नहीं है। सरयू राय के मुताबिक, कमिटी ने उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी निर्देश दिया है, जिनकी निगरानी या जिम्मेदारी के दौरान कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के निर्माण होने दिया गया।
किसकी निगरानी में हुआ निर्माण?
अब सवाल यह है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत थे, तो उन्हें समय रहते रोका क्यों नहीं गया? संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? कमिटी के निर्देश के बाद इन सवालों की जांच की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
यदि जांच में लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
संरक्षण बनाम पर्यटन की बहस फिर तेज
दलमा में पर्यटन गतिविधियों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का मुद्दा नया नहीं है। एक ओर दलमा को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की कोशिशें होती रही हैं, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों और पर्यावरण की संवेदनशीलता को देखते हुए निर्माण गतिविधियों पर नियम लागू हैं।
CEC के बताए गए निर्देशों के बाद अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है, नियमों के विपरीत पाए जाने वाले निर्माणों पर कार्रवाई करना और दलमा के संवेदनशील पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
सरकार की कार्रवाई पर टिकी नजर
सरयू राय ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इम्पावर्ड कमिटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो केवल निर्माण हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्माण की अनुमति देने या उसे रोकने में विफल रहने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि झारखंड सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और दलमा के कथित अवैध निर्माणों को लेकर कार्रवाई कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।