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झारखंड के लिए केरल का विजिंजम मॉडल! समुद्र से जुड़कर बदलेगा कारोबार का रास्ता, 2028 तक 3 गुना बढ़ेगा व्यापार - aksharsamvad.com
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रांची : झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिजों के परिवहन की बड़ी चुनौती हमेशा बनी रहती है। ऐसे में केरल का विजिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट झारखंड के लिए विकास और पर्यावरण संतुलन का एक नया मॉडल बन सकता है। गहरे समुद्र में बने इस बंदरगाह से कम विस्थापन और आधुनिक तकनीक के साथ बड़े जहाजों के संचालन का रास्ता खुला है।

समुद्र में तीन किलोमीटर लंबी दीवार, फिर भी पर्यावरण पर कम असर

केरल के तिरुवनंतपुरम से करीब 40 किलोमीटर दूर अडानी विजिंजम समुद्र परिवहन परियोजना एक अलग तरह का मॉडल पेश करती है। बंदरगाह के निर्माण में समुद्र के भीतर करीब तीन किलोमीटर लंबी दीवार बनाई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना में अपेक्षाकृत कम विस्थापन हुआ और समुद्री पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए निर्माण किया गया। झारखंड में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के दौरान पर्यावरण तथा विस्थापन का मुद्दा अक्सर सामने आता है। ऐसे में विजिंजम मॉडल से कई अहम सबक लिए जा सकते हैं।

बड़े जहाजों के लिए विदेश जाने की जरूरत होगी कम

विजिंजम पोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गहराई है। करीब 18 मीटर की गहराई होने के कारण यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित की गई है।

इसका सीधा फायदा झारखंड जैसे लैंडलॉक राज्य को मिल सकता है। वर्तमान में खनिज और औद्योगिक माल के परिवहन में समुद्री बंदरगाहों तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनने पर झारखंड से निकलने वाले माल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं।

20 हजार से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार

विजिंजम मॉडल का आर्थिक प्रभाव भी बड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना से 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। साथ ही बड़े जहाजों के यहां आने से दूसरे देशों के बंदरगाहों पर निर्भरता कम होती है और देश को राजस्व का लाभ मिलता है।

झारखंड में भी खनन आधारित उद्योगों के साथ आधुनिक लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को जोड़ा जाए तो रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

2028 तक तीन गुना बढ़ाने की तैयारी

विजिंजम सी पोर्ट अभी विकास के शुरुआती चरण में है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में करीब 35 हजार कंटेनर रखने की क्षमता है, जिसे 2028 तक बढ़ाकर एक समय में करीब एक लाख कंटेनर तक करने की योजना बताई गई है।

बैकवाटर की लंबाई भी बढ़ाने की योजना है, जिससे बंदरगाह की क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।

पूरी तरह ऑटोमेटिक है कंटेनर का उतार-चढ़ाव

विजिंजम पोर्ट पर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल इसकी खास पहचान है। यहां उच्च क्षमता वाली क्रेन और ऑटोमेशन सिस्टम के जरिए कंटेनरों के संचालन को नियंत्रित किया जाता है।

कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के परिवहन में भी ऐसी तकनीक अपनाकर प्रदूषण कम करने और लॉजिस्टिक्स को अधिक प्रभावी बनाने की संभावना है।

झारखंड के लिए क्या है बड़ा सबक?

झारखंड के लिए विजिंजम मॉडल सिर्फ एक बंदरगाह की कहानी नहीं, बल्कि पर्यावरण, रोजगार, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास को एक साथ जोड़ने का उदाहरण हो सकता है। राज्य में नई औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मानकों के साथ आधुनिक परिवहन और डिजिटल लॉजिस्टिक्स को प्राथमिकता दी जाए तो खनिज संपदा का बेहतर आर्थिक इस्तेमाल संभव है।

यानी समुद्र भले झारखंड से दूर हो, लेकिन विजिंजम जैसा मॉडल राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए नई दिशा जरूर दिखा सकता है।

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