
जमशेदपुर : जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में घर-घर कचरा उठाव की व्यवस्था को अब तकनीक से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके तहत करीब 50 हजार घरों का सर्वे कर डिजिटल मैपिंग की जाएगी और प्रत्येक मकान पर आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग लगाया जाएगा। इससे कचरा उठाव की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी।
हर घर की बनेगी डिजिटल पहचान
योजना के तहत जेएनएसी क्षेत्र के करीब 50 हजार आवासीय भवनों और मकानों का सर्वे किया जाएगा। सर्वे के बाद प्रत्येक घर का डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा और संबंधित मकान पर आरएफआईडी टैग लगाया जाएगा।
कचरा उठाने वाले वाहनों में विशेष स्कैनर लगाए जाएंगे। जैसे ही कचरा वाहन किसी घर तक पहुंचेगा और टैग स्कैन होगा, समय और तारीख के साथ कचरा उठाव का रिकॉर्ड ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।
कचरा नहीं उठा तो अधिकारियों को तुरंत मिलेगी जानकारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी इलाके में कचरा वाहन के नहीं पहुंचने की शिकायत का सत्यापन पहले की तुलना में आसान होगा। डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाया जा सकेगा कि कचरा वाहन किस क्षेत्र में पहुंचा और किन घरों से कचरा एकत्र किया गया।
इससे संबंधित सफाईकर्मी या ठेकेदार की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि ऑनलाइन निगरानी से कचरा उठाव की व्यवस्था अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी।
दुर्गापूजा से पहले शुरू करने की तैयारी
जेएनएसी प्रशासन इस नई तकनीकी व्यवस्था को दुर्गापूजा से पहले शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पूरी व्यवस्था को लागू करने में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है।
जेएनएसी प्रशासन की योजना के अनुसार सर्वे और डिजिटल मैपिंग के बाद आरएफआईडी टैग लगाने का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
भविष्य की योजनाओं में भी इस्तेमाल होगा डिजिटल डेटा
इस सर्वे से जेएनएसी क्षेत्र के आवासीय भवनों और मकानों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। प्रशासन भविष्य में इस डेटा का इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता अभियानों और कचरा प्रबंधन से जुड़ी नई योजनाएं तैयार करने में कर सकेगा।
क्या बदलेगा नई व्यवस्था से?
- करीब 50 हजार घरों की डिजिटल मैपिंग होगी।
- प्रत्येक घर पर आरएफआईडी टैग लगाया जाएगा।
- कचरा वाहनों में विशेष स्कैनर लगाए जाएंगे।
- कचरा उठाव का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज होगा।
- लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
- भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक डिजिटल डेटा उपलब्ध होगा।
योजना का सबसे बड़ा असर यह माना जा रहा है कि कचरा उठाव की प्रक्रिया अब केवल दावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर घर से कचरा उठाने का डिजिटल रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध होगा।